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मां के 9 दिन का नैवेद्यम: नवरात्रि में किस दिन देवी को क्या भोग लगाएं?

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 मां के 9 दिन का नैवेद्यम: नवरात्रि में किस दिन देवी को क्या भोग लगाएं? नवरात्रि हिंदू धर्म के सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है। इन नौ दिनों में भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करते हैं और अपनी श्रद्धा के अनुसार नैवेद्यम यानी भोग अर्पित करते हैं। माना जाता है कि देवी-पूजन में केवल बड़े-बड़े पकवानों का महत्व नहीं है, बल्कि भक्ति, शुद्धता और श्रद्धा सबसे महत्वपूर्ण होती है। घर में उपलब्ध सात्त्विक सामग्री से बनाया गया साधारण भोजन भी यदि श्रद्धा से मां को अर्पित किया जाए तो वह नैवेद्यम बन जाता है। नवरात्रि के दौरान बहुत से भक्त यह जानना चाहते हैं कि मां के 9 दिन कौन सा भोग लगाना चाहिए, नवरात्रि में किस दिन कौन सा नैवेद्यम चढ़ाया जाता है और नौ देवियों को कौन-कौन से प्रसाद प्रिय माने जाते हैं। इस लेख में हम जानेंगे कि नवरात्रि के 9 दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों को कौन सा नैवेद्यम अर्पित किया जा सकता है, भोग लगाने की सरल विधि क्या है और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। महत्वपूर्ण: अलग-अलग क्षेत्रों, परंपराओं और परिवारों में देवी को अर्पित किए जाने वाले भोग अलग हो ...

नवरात्रि में घर के मंदिर में क्या रखें और क्या न रखें? जानिए जरूरी नियम

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  नवरात्रि में घर के मंदिर में क्या रखें और क्या न रखें? मां दुर्गा की पूजा के लिए पूरी जानकारी नवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख और पवित्र पर्वों में से एक है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। नवरात्रि के दौरान बहुत से लोग अपने घर के मंदिर में विशेष पूजा करते हैं, कलश स्थापित करते हैं, अखंड ज्योत जलाते हैं और मां भगवती का ध्यान एवं मंत्र जाप करते हैं। लेकिन अक्सर लोगों के मन में एक सवाल रहता है कि नवरात्रि में घर के मंदिर में क्या रखना चाहिए और क्या नहीं रखना चाहिए? क्या घर के मंदिर में कलश रखना जरूरी है? क्या अखंड ज्योत रख सकते हैं? क्या नारियल को नवरात्रि के बाद भी रखा जा सकता है? क्या देवी-देवताओं की नई तस्वीर रखनी चाहिए? क्या खंडित मूर्ति या टूटी हुई पूजा सामग्री मंदिर में रख सकते हैं? नवरात्रि में घर के मंदिर की सफाई कैसे करनी चाहिए? इन सभी सवालों के जवाब इस लेख में विस्तार से जानेंगे। नोट: पूजा-पद्धति, देवी-देवताओं की स्थापना और कुछ नियम अलग-अलग परिवारों, परंपराओं और संप्रदायों में अलग हो सकते हैं। इसलिए जहां आवश्यक हो, अपनी प...