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ब्रज की होली 2026: पूरी तिथि, इतिहास, क्यों खेली जाती है और कैसे पहुंचें (बरसाना से दाऊजी हुरंगा तक)

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  🌸 ब्रज की होली 2026: इतिहास, कारण और सम्पूर्ण यात्रा गाइड ब्रज की होली 2026 ब्रज की होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की लीलाओं का जीवंत उत्सव है। यह उत्सव लगभग 40 दिनों तक चलता है। ब्रज क्षेत्र के मुख्य स्थान हैं – मथुरा , वृंदावन , बरसाना , नंदगांव , गोकुल । गोवेर्धन  📅 ब्रज की होली 2026 का पूरा कार्यक्रम (इतिहास सहित) 🔸 25 फरवरी 2026 – लड्डू होली (बरसाना) ब्रज की होली 2026 📍 स्थान: राधा रानी मंदिर, बरसाना क्यों खेली जाती है? कहा जाता है कि जब नंदगांव के गोप बरसाना आए तो उनका स्वागत लड्डुओं से किया गया। उसी घटना की स्मृति में यह परंपरा निभाई जाती है। कब से शुरू हुई? यह परंपरा लगभग 300–400 वर्ष पुरानी मानी जाती है, जब मंदिर परंपराएं संगठित रूप से शुरू हुईं। कैसे पहुंचें? मथुरा जंक्शन से 50 किमी बस/टैक्सी से 1.5 घंटे दिल्ली से लगभग 160–170 किमी सड़क मार्ग 🔸 26 फरवरी 2026 – लट्ठमार होली (बरसाना) ब्रज की होली 2026 क्यों खेली जाती है? कथा के अनुसार श्रीकृष्ण राधा जी को चिढ़ाने बरसाना आते थे। सखियां उन्हें लाठ...

गर्भवती महिलाएं ग्रहण के समय क्या करें और क्या न करें | धार्मिक मान्यताएं और वैज्ञानिक कारण

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 गर्भवती महिलाओं के लिए ग्रहण के नियम – जानें क्या करना चाहिए और किन बातों से बचना चाहिए गर्भवती महिलाएं ग्रहण के समय क्या करें और क्या न करें भारतीय संस्कृति में ग्रहण को अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील समय माना जाता है। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं के लिए ग्रहण को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं और सावधानियां बताई गई हैं। माना जाता है कि ग्रहण के दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है जिसका प्रभाव गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ सकता है। हालांकि आधुनिक विज्ञान इन बातों को पूरी तरह प्रमाणित नहीं करता, फिर भी हमारी परंपराओं में बताए गए नियम गर्भवती महिला और शिशु की सुरक्षा के उद्देश्य से बनाए गए हैं। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि ग्रहण के समय गर्भवती महिलाओं को क्या करना चाहिए और किन बातों से बचना चाहिए। ग्रहण क्या होता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं तब ग्रहण की स्थिति बनती है। ग्रहण दो प्रकार का होता है। ✔ सूर्य ग्रहण ✔ चंद्र ग्रहण धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण का समय अशुभ माना जाता है और इस दौरान कुछ विशेष नियमों का पालन करना जरूरी माना जाता है। गर्भवत...

ग्रहण काल के बाद घर और मंदिर का शुद्धिकरण कैसे करें? सम्पूर्ण धार्मिक विधि और नियम

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 ग्रहण काल के बाद घर और मंदिर का शुद्धिकरण कैसे करें? सनातन धर्म में ग्रहण को अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील समय माना गया है। चाहे वह सूर्य ग्रहण हो या चंद्र ग्रहण, इस दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ने की मान्यता होती है। इसी कारण ग्रहण समाप्त होने के बाद घर और मंदिर का शुद्धिकरण करना अत्यंत आवश्यक माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल के दौरान देवी-देवताओं की मूर्तियां, पूजा स्थल और घर का वातावरण प्रभावित होता है। इसलिए ग्रहण समाप्त होते ही शुद्धिकरण करने से सकारात्मक ऊर्जा का पुनः प्रवेश होता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है। ग्रहण के बाद शुद्धिकरण क्यों जरूरी माना जाता है? धर्म शास्त्रों के अनुसार ग्रहण काल में वातावरण में सूक्ष्म अशुद्धियां उत्पन्न होती हैं। यह समय साधना और जप के लिए श्रेष्ठ माना जाता है लेकिन सामान्य कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है। ग्रहण समाप्त होने के बाद शुद्धिकरण करने से: ✔ घर का वातावरण पवित्र होता है ✔ नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है ✔ देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है ✔ परिवार में मानसिक शांति और सकारात्मकता आती है वैज्ञानिक दृ...

नारद मोह लीला क्या है? पूरी कथा, महत्व और सीख | Narad Moh Leela Full Story

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 नारद मोह लीला का संपूर्ण वर्णन 🌼 प्रस्तावना सनातन धर्म में भगवान अपने भक्तों को सही मार्ग दिखाने के लिए समय-समय पर अनेक लीलाएँ करते हैं। ऐसी ही एक प्रसिद्ध और शिक्षाप्रद कथा है नारद मुनि और भगवान विष्णु से जुड़ी नारद मोह लीला। यह कथा हमें बताती है कि आध्यात्मिक शक्ति और ज्ञान प्राप्त करने के बाद भी अहंकार मनुष्य को भ्रमित कर सकता है। भगवान विष्णु अपने भक्तों के कल्याण हेतु कभी-कभी उन्हें परीक्षा में डालते हैं ताकि उनका अहंकार समाप्त हो सके। नारद मुनि का तप और अहंकार पौराणिक कथाओं के अनुसार, नारद मुनि भगवान विष्णु के परम भक्त थे। वे निरंतर "नारायण नारायण" का जाप करते रहते थे और तीनों लोकों में भ्रमण करते हुए भगवान की महिमा का प्रचार करते थे। एक समय नारद मुनि ने कठोर तपस्या करके कामदेव को भी पराजित कर दिया। इस विजय के बाद उनके मन में यह अहंकार उत्पन्न हो गया कि अब वे किसी भी प्रकार के मोह या आकर्षण में नहीं फँस सकते। उन्होंने अपनी इस विजय का वर्णन भगवान शिव के सामने किया। भगवान शिव ने उन्हें सावधान करते हुए कहा कि इस बात का उल्लेख भगवान विष्णु के सामने न करें, लेकिन नारद मुनि...

अक्षय तृतीया 2026 : धार्मिक महत्व, पौराणिक कथा, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, क्या खरीदें और क्या करें

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 अक्षय तृतीया 2026 : धार्मिक महत्व, पूजा विधि और शुभ फल प्राप्ति का दिव्य पर्व अक्षय तृतीया क्या है अक्षय तृतीया हिन्दू धर्म का अत्यंत पवित्र और शुभ पर्व माना जाता है। यह पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व अत्यधिक बताया गया है। “अक्षय” शब्द का अर्थ होता है — जो कभी समाप्त न हो। अर्थात इस दिन किया गया पुण्य, दान, जप, तप और पूजा का फल जीवन भर बढ़ता रहता है। हिन्दू धर्म में यह दिन इतना शुभ माना जाता है कि इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यापार, संपत्ति खरीदना या अन्य मांगलिक कार्य बिना मुहूर्त देखे भी किए जा सकते हैं। अक्षय तृतीया का पौराणिक इतिहास अक्षय तृतीया से जुड़ी कई धार्मिक मान्यताएं और पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं।  त्रेता युग का प्रारंभ धार्मिक ग्रंथों के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन ही त्रेता युग का प्रारंभ हुआ था। इसलिए यह दिन सृष्टि में शुभ कार्यों के प्रारंभ का प्रतीक माना जाता है। भगवान परशुराम का जन्म मान्यता है कि इस दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। परशुराम को विष्णु का छठा अवतार माना जाता है। उन्होंने अध...

Bholenath Electronic Dance Bhajan Lyrics | EDM Shiv Bhajan | Har Har Mahadev DJ Song

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   Ek Bholenath Electronic Dance Bhajan Lyrics | EDM Shiv Bhajan 🔱 Bholenath Electronic Dance Bhajan Lyrics 🙏 Har Har Mahadev! 🙏 If you are searching for Ek Bholenath Electronic Dance Bhajan Lyrics , you are at the right place. This powerful EDM Shiv bhajan blends modern electronic dance beats with deep devotion to Lord Shiva (Mahadev). This song is perfect for Mahashivratri, Shravan month, DJ nights, and devotional festivals where spirituality meets high energy music. 🎧 About Ek Bholenath EDM Shiv Bhajan “Ek Bholenath” is a devotional song dedicated to Lord Shiva , also known as Mahadev, Shankar, and Bholenath. This electronic dance version adds: Energetic EDM beats Powerful bass drops Spiritual chanting vibes Youth-friendly devotional sound It connects the younger generation with bhakti in a modern style. 📝 Ek Bholenath Electronic Dance Bhajan Lyrics Bum bum bhole Bhole bhole bhole Bum bum bhole Har har Shambhoo Bum bum bhole Bhole bhole bho...

Holika Dahan 2026: होलिका दहन का महत्व, पूजा विधि, पौराणिक कथा और शुभ मुहूर्त

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  Holika Dahan 2026: होलिका दहन का महत्व, पूजा विधि, पौराणिक कथा और शुभ मुहूर्त होलिका दहन क्या है? होलिका दहन हिंदू धर्म का अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि की रात को मनाया जाता है और इसके अगले दिन रंगों का त्योहार होली मनाया जाता है। होलिका दहन को "छोटी होली" भी कहा जाता है। इस दिन लोग अग्नि जलाकर पूजा करते हैं और अपने जीवन से नकारात्मक ऊर्जा, रोग और दुर्भाग्य को दूर करने की कामना करते हैं। हिंदू संस्कृति में यह पर्व सामाजिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह सत्य, धर्म और भक्ति की विजय का प्रतीक है। 🔶 होलिका दहन की पौराणिक कथा होलिका दहन का संबंध भगवान विष्णु के परम भक्त प्रह्लाद से जुड़ा हुआ है। प्राचीन काल में हिरण्यकश्यप नाम का एक अत्याचारी असुर राजा था। उसने कठोर तपस्या करके भगवान ब्रह्मा से वरदान प्राप्त किया था जिससे वह लगभग अजेय हो गया था। इसके बाद वह स्वयं को भगवान मानने लगा और सभी से अपनी पूजा करवाने लगा। लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु क...