१०८ बार “ॐ” जप का महत्व: मन, शरीर और आत्मा पर अद्भुत प्रभाव
१०८ बार “ॐ” जप का महत्व: मन, शरीर और आत्मा पर अद्भुत प्रभाव
१०८ संख्या का गूढ़ अर्थ
ज्योतिषीय महत्व: १२ राशियाँ × ९ ग्रह = १०८। यह सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का सूक्ष्म प्रतीक है।
योग परम्परा: शरीर में ७२,००० नाड़ियाँ हैं, जिनमें से १०८ मुख्य नाड़ी-मार्ग माने जाते हैं। जप से ये शुद्ध होते हैं।
वैदिक गणना: सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी सूर्य के व्यास की लगभग १०८ गुना है; चन्द्रमा और पृथ्वी के बीच भी यही अनुपात है।
सनातन धर्म में १०८ को अत्यंत शुभ माना गया है। प्राचीन ऋषियों के अनुसार ब्रह्माण्ड की १२ राशियाँ और ९ ग्रह मिलकर १०८ का अद्भुत योग बनाते हैं। इसी कारण जपमाला में १०८ मनके होते हैं, जो पूर्णता और ऊर्जा का प्रतीक हैं।
ॐ जप का आध्यात्मिक महत्व
“ॐ” सभी मंत्रों का बीज है। जब आप १०८ बार ॐ का उच्चारण करते हैं, तो आपकी आंतरिक ध्वनि ब्रह्माण्डीय कंपन से जुड़ जाती है। यह ध्वनि शरीर के ऊर्जा केन्द्रों (चक्रों) को संतुलित करती है और मन को गहरी शांति देती है।
मन और शरीर पर लाभ
तनाव में कमी: शोध से सिद्ध है कि ॐ जप से मस्तिष्क की तरंगें अल्फ़ा अवस्था में आती हैं।
हृदय स्वास्थ्य: नियमित जप से हृदय की धड़कन संतुलित रहती है।
एकाग्रता व सकारात्मकता: १०८ बार दोहराव से ध्यान गहरा होता है और नकारात्मक विचार दूर होते हैं।
सही विधि
प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में शांत स्थान पर बैठें।
रीढ़ सीधी रखें, आंखें बंद करें।
श्वास लेते समय “ओ…” और छोड़ते समय “म्…” का उच्चारण करें।
१०८ बार माला के प्रत्येक मनके को धीरे-धीरे चलाते हुए जप करें।
दिनचर्या में शामिल करने के सुझाव
प्रारंभ में प्रतिदिन २७ या ५४ जप से शुरुआत करें।
धीरे-धीरे १०८ बार तक बढ़ाएँ।
कार्यस्थल पर तनाव होने पर कुछ मिनट का छोटा जप भी लाभकारी है।
परिवार के साथ समूह जप करने से घर में सकारात्मकता बढ़ती है।

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