आदि शंकराचार्य कौन थे? जीवन परिचय और योगदान

 आदि शंकराचार्य कौन थे?

आदि शंकराचार्य का चित्र - अद्वैत वेदांत दर्शन के प्रवर्तक"
आदि शंकराचार्य कौन थे 









आदि शंकराचार्य (Adi Shankaracharya) 8वीं शताब्दी के महान हिन्दू दार्शनिक, संत और अद्वैत वेदांत (Advaita Vedanta) दर्शन के प्रणेता थे। उनका जन्म केरल के कालड़ी गाँव में हुआ था। बहुत कम उम्र में ही उन्होंने गहन वेदों, उपनिषदों और शास्त्रों का अध्ययन कर लिया।


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आदि शंकराचार्य का जीवन परिचय

(Keyword: Adi Shankaracharya biography in Hindi)

जन्म स्थान: कालड़ी, केरल

जन्म वर्ष: लगभग 788 ईस्वी

पिता का नाम: शिवगुरु

माता का नाम: आर्यांबा


कम उम्र में ही उन्होंने संन्यास धारण किया और पूरे भारत की यात्रा (दिग्विजय यात्रा) की। इस यात्रा में उन्होंने विभिन्न दार्शनिकों और विद्वानों से शास्त्रार्थ किया और अद्वैत वेदांत दर्शन को प्रतिष्ठित किया।


अद्वैत वेदांत दर्शन

(Keyword: Advaita Vedanta in Hindi)

आदि शंकराचार्य का मुख्य दर्शन अद्वैत वेदांत था। इसके अनुसार—

आत्मा (आत्मन्) और ब्रह्म एक ही हैं।

जीव और ईश्वर में कोई भेद नहीं है।

अज्ञान (अविद्या) ही संसार में दुख का कारण है।

ज्ञान और भक्ति के माध्यम से मोक्ष की प्राप्ति संभव है।



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आदि शंकराचार्य का योगदान

(Keyword: Adi Shankaracharya contribution)

1. चार मठों की स्थापना:

गोवर्धन मठ (पुरी)

शारदा मठ (द्वारका)
Kk
ज्योतिर्मठ (उत्तराखंड)

श्रींगेरी मठ (कर्नाटक)



2. शास्त्रार्थ: पूरे भारत में शास्त्रार्थ करके सनातन धर्म को पुनर्जीवित किया।


3. ग्रंथ रचना: भाष्य लिखे— उपनिषद, भगवद गीता और ब्रह्मसूत्र पर।


4. भक्ति साहित्य: भज गोविंदम, सौंदर्य लहरी आदि की रचना की।




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आज के समय में महत्व

(Keyword: Adi Shankaracharya relevance today)

आज भी उनके दर्शन से प्रेरणा मिलती है। उनका अद्वैत वेदांत हमें यह सिखाता है कि समस्त जगत में केवल एक ही परम सत्य है और सभी प्राणी उसी के अंश हैं।


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निष्कर्ष

आदि शंकराचार्य का जीवन हमें आध्यात्मिकता, ज्ञान और भक्ति का अद्वितीय संदेश देता है। वे केवल एक दार्शनिक ही नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति के रक्षक और विश्व-गुरु थे।

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