भाई दूज 2025: यमुना स्नान का महत्व और पूजा विधि

 भाई दूज 2025 (23 अक्टूबर) पर यमुना स्नान का महत्व, पूजा विधि और लाभ

भाई दूज 2025 यमुना स्नान का महत्व दर्शाती पारंपरिक पूजा


🟢 प्रस्तावना


भाई दूज, जिसे यम द्वितीया भी कहा जाता है, दीपावली के दो दिन बाद आने वाला पावन पर्व है। 2025 में यह पर्व 23 अक्टूबर, गुरुवार को मनाया जाएगा। भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक यह पर्व पौराणिक कथाओं, धार्मिक मान्यताओं और प्रकृति संरक्षण का संदेश देता है। खास बात यह है कि इस दिन यमुना स्नान का विशेष महत्व है।




🟢 पौराणिक कथा और यम-यमुना का संबंध


पौराणिक मान्यता है कि सूर्यदेव की संतान यमराज और यमुनाजी का आपसी स्नेह अत्यंत गहरा था। यमुनाजी अपने भाई यमराज को बार-बार अपने घर आने का निमंत्रण देती थीं। एक दिन कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यमराज अपनी बहन के घर पहुँचे। यमुनाजी ने उनका विधिवत स्वागत कर स्नान करवाया, तिलक किया और भोजन कराया। प्रसन्न होकर यमराज ने बहन को वरदान दिया कि इस दिन जो भी यमुना में स्नान कर अपनी बहन से तिलक करवाएगा, उसकी आयु बढ़ेगी और पाप नष्ट होंगे। तभी से भाई दूज पर यमुना स्नान की परंपरा चली आ रही है।




🟢 धार्मिक महत्व


1. पवित्रता और मोक्ष प्राप्ति: यमुना जल को गंगा के समान पवित्र माना जाता है। इस दिन स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है।



2. पापों का नाश: यह स्नान जीवन के दोष और पापों को समाप्त करता है।



3. पारिवारिक सुख-समृद्धि: भाई-बहन के रिश्ते में मधुरता बढ़ती है और परिवार में शांति आती है।






🟢 2025 का शुभ मुहूर्त


भाई दूज तिथि प्रारंभ: 22 अक्टूबर 2025, रात 10:27 बजे


भाई दूज तिथि समाप्त: 23 अक्टूबर 2025, रात 07:41 बजे


यम द्वितीया पूजन का सर्वश्रेष्ठ समय: 23 अक्टूबर 2025, सुबह 06:30 से 08:50 (स्थानीय समयानुसार परिवर्तन सम्भव)




🟢 यमुना स्नान की विधि


1. प्रातः काल उठकर संकल्प लें – “मैं कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यम-यमुना का स्मरण करते हुए पवित्र स्नान कर रहा/रही हूँ।”



2. यमुना अथवा किसी पवित्र नदी में स्नान करें। पास में नदी न हो तो गंगाजल मिलाकर घर पर स्नान कर सकते हैं।



3. स्नान के बाद यमराज और यमुनाजी की प्रतिमा या चित्र पर रोली, चावल और दीपक से पूजा करें।



4. भाई-बहन मिलकर आरती करें और तिलक का कार्यक्रम सम्पन्न करें।




🟢 वैज्ञानिक दृष्टिकोण


स्वास्थ्य लाभ: ठंडे जल में स्नान करने से रक्त संचार बेहतर होता है, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।


मानसिक शांति: नदी का प्राकृतिक वातावरण मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।




🟢 पर्यावरण संरक्षण संदेश

नदी स्नान के समय साबुन, प्लास्टिक और अन्य प्रदूषक वस्तुओं का उपयोग न करें। केवल प्राकृतिक सामग्री का प्रयोग करें ताकि यमुना और अन्य नदियाँ स्वच्छ बनी रहें।




🟢 भाई-बहन के रिश्ते की गहराई

भाई दूज केवल पूजा या स्नान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भाई-बहन के अनोखे रिश्ते का उत्सव है। इस दिन बहन अपने भाई की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए तिलक करती है, वहीं भाई बहन की सुरक्षा का संकल्प लेता है।



🟢 निष्कर्ष

भाई दूज 2025, 23 अक्टूबर को मनाया जाएगा। इस दिन यमुना स्नान कर यमराज और यमुनाजी का पूजन करने से न केवल धार्मिक लाभ प्राप्त होते हैं, बल्कि यह शरीर और मन को भी शुद्ध करता है। भाई-बहन का प्रेम और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता—दोनों संदेश यह पर्व हमें देता है।



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