🕉️ श्री युगलाष्टकम् — पूर्ण पाठ और हिंदी अर्थ
✨ प्रस्तावना
श्री युगलाष्टकम् राधा‑कृष्ण के दिव्य प्रेम और एकात्मकता की स्तुति है। यह आठ छंदों वाला स्तोत्र है जो बताता है कि श्री राधा और श्री कृष्ण दोनों में परस्पर प्रेम के स्वरूप कैसे निहित हैं, और उन्हें जीवन का नित्य आश्रय क्यों माना जाता है।
📜 श्लोक 1
कृष्णप्रेममयी राधा राधाप्रेममयो हरिः ।
जीवनेन धने नित्यं, राधाकृष्णौ गतिर्मम ॥1॥
हिंदी अर्थ:
श्रीराधा कृष्ण के प्रेम से पूर्ण हैं, और श्रीकृष्ण राधा के प्रेम से पूर्ण हैं।
जीवन में और मृत्यु के बाद भी राधा‑कृष्ण ही मेरा शाश्वत आश्रय हैं।
📜 श्लोक 2
कृष्णस्य द्रविणं राधा राधायाः द्रविणं हरिः ।
जीवनेंन धने नित्यं, राधाकृष्णौ गतिर्मम ॥2॥
हिंदी अर्थ:
श्रीकृष्ण का सर्वस्व श्रीराधा हैं, और श्रीराधा का सर्वस्व श्रीकृष्ण हैं।
जीवन में और बाद में भी उन्हीं दोनों में ही मेरी शरण है।
📜 श्लोक 3
कृष्णप्राणमयी राधा राधाप्राणमयो हरिः ।
जीवनेन धने नित्यं, राधाकृष्णौ गतिर्मम ॥3॥
हिंदी अर्थ:
श्रीकृष्ण के प्राण श्रीराधा हैं, और श्रीराधा के प्राण श्रीकृष्ण हैं।
जीवन और मृत्यु दोनों में उन दोनों का साथ ही मेरा असली धन है।
📜 श्लोक 4
कृष्णद्रवामयी राधा राधाद्रवामयो हरिः ।
जीवनेन धने नित्यं, राधाकृष्णौ गतिर्मम ॥4॥
हिंदी अर्थ:
श्रीकृष्ण प्रेम के रस से ओत‑प्रोत श्रीराधा हैं, और श्रीराधा प्रेम के रस से ओत‑प्रोत श्रीकृष्ण हैं।
जीवन में और मृत्यु के बाद भी उन्हीं दोनों का प्रेम ही मेरा आश्रय है।
📜 श्लोक 5
कृष्ण गेहे स्थिता राधा राधा गेहे स्थितो हरिः ।
जीवनेन धने नित्यं, राधाकृष्णौ गतिर्मम ॥5॥
हिंदी अर्थ:
श्रीकृष्ण श्रीराधा के हृदय में स्थित हैं, और श्रीराधा श्रीकृष्ण के हृदय में स्थित हैं।
उन दोनों का एक‑दूसरे में निवास ही मेरा नित्य धन है।
📜 श्लोक 6
कृष्णचित्तस्थिता राधा राधाचित्तस्थितो हरिः ।
जीवनेन धने नित्यं, राधाकृष्णौ गतिर्मम ॥6॥
हिंदी अर्थ:
श्रीराधा श्रीकृष्ण के चित्त में विराजमान हैं, और श्रीकृष्ण श्रीराधा के चित्त में विराजमान हैं।
यह ऐसा प्रेम‑संबंध है जो लौकिक नहीं, अलौकिक भी है।
📜 श्लोक 7
नीलाम्बरधरा राधा पीताम्बरो धरो हरिः ।
जीवनेन धने नित्यं, राधाकृष्णौ गतिर्मम ॥7॥
हिंदी अर्थ:
श्रीराधा नीले वस्त्र धारण करती हैं, और श्रीकृष्ण पीले वस्त्र धारण करते हैं।
यह दोनों का रूप और रंग प्रेम‑भाव का प्रतीक हैं —
और यही प्रेम जीवन और मृत्यु दोनों में हमारा आश्रय है।
📜 श्लोक 8
वृन्दावनेश्वरी राधा कृष्णो वृन्दावनेश्वरः ।
जीवनेन धने नित्यं, राधाकृष्णौ गतिर्मम ॥8॥
हिंदी अर्थ:
श्रीराधा वृन्दावन की अधिष्ठात्री (मालिनी) हैं, और श्रीकृष्ण वृन्दावन के अधिष्ठाता (पालक) हैं।
जीवन और मृत्यु दोनों में उन दोनों का संग ही मेरा उद्धार है।
🌼 श्री युगलाष्टकम् के प्रमुख लाभ
✅ 1. भाव‑भक्ति में वृद्धि
इस अष्टक के जाप से भक्त के मन में राधा‑कृष्ण के प्रति गहन प्रेम जागृत होता है।
✅ 2. मन की शांति और संतुलन
प्रेम‑भाव और ध्यान से जीवन में मानसिक शांति आती है।
✅ 3. संकटमोचन स्तुति
कई भक्त मानते हैं कि इसे सुनने या पढ़ने से घर‑परिवार के दुख और बाधाएँ दूर होती हैं। J
✅ 4. देवी‑देवता का अनुग्रह
राधा‑कृष्ण का स्मरण जीवन में आध्यात्मिक उन्नति और भक्ति की गहराई लाता है।
🎧 🔱 सुनें / घर में चलाएँ
👉 नीचे श्री युगलाष्टकम् स्तुति को श्रद्धा भाव से सुनें या घर के पूजा स्थान में शांत मन से चलाएँ।
Note: इसे राधा अष्टमी, प्रेम दुर्गा पूजा या हर भक्ति समय पर प्ले कर सकते हैं।
🪔 युगलाष्टकम् का पठनीय तरीका
✔ स्वच्छ मन से
✔ तुलसी/स्फटिक माला से
✔ प्रातः या संध्या समय
✔ 108 या 1008 पाठ आप कर सकते हैं



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