🕉️ गिरिराज अष्टक: पूरा पाठ और लाभ
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| Giriraj Ashtak – Purn Path aur Labh |
✨ भूमिका
गिरिराज अष्टक भगवान कृष्ण के गोवर्धन पर्वत स्वरूप गिरिराज जी की महिमा का आठ चरणों वाला स्तोत्र है।
ब्रज में गिरिराज जी की भक्ति अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
इस अष्टक के नियमित पाठ से जीवन में सुख, समृद्धि और संकट निवारण होता है।
📜 गिरिराजधार्याष्टकम – संस्कृत पाठ और अर्थ
श्लोक 1
भक्ताभिलाषा चरितानुसारी दुग्धादिचौर्येन यशो विसारी।
कुमारिता नन्दिता घोषनारी ममः प्रभु श्री गिरिराजधारी॥१॥
हिंदी अर्थ:
हे गिरिराज जी! आप ऐसे हैं जो भक्तों की इच्छा पूरी करने वाले हैं।
जो सभी प्रसिद्धि, वैभव और यश पाने वाले हैं।
जो नंदलाल की क्रीड़ा में भाग लेने वाली कुमारियों के आनंदित होने वाले हैं।
मैं आपका नमन करता हूँ।
भावार्थ: भक्त की भक्ति की इच्छा के अनुसार गिरिराज जी सभी सुख और यश प्रदान करते हैं और ब्रज की नंदलाल कुमारियों के आनंद में सहभागी हैं।
श्लोक 2
व्रजांगना वृन्द सदाबिहारी अंगैर्गुहागार तमोपहारी।
क्रीड़ा रसावेश तमोभिसारी ममः प्रभु श्री गिरिराजधारी॥२॥
हिंदी अर्थ:
हे गिरिराज जी! आप सदैव वृजांगनाओं के संग रहने वाले हैं,
आपके अंगों से अज्ञान और अंधकार दूर होता है।
आपकी क्रीड़ा और प्रेम रस में डूबने वाली लीला भक्तों के लिए आनंद और प्रेरणा का स्रोत है।
मैं आपका नमन करता हूँ।
भावार्थ: गिरिराज जी की लीला और संगत अज्ञान का नाश करती है और भक्तों के मन को प्रेम और आनंद से भर देती है।
श्लोक 3
वेणुस्वनानन्दिता पन्नागारी रसातलानृत्य पद प्रचारी।
क्रीड़न्वयस्या कृतिदैत्यमारी ममः प्रभु श्री गिरिराजधारी॥३॥
हिंदी अर्थ:
हे गिरिराज जी! आप बांसुरी की ध्वनि से आनंदित होने वाले हैं और
वृंदावन की नर्तकी (पन्नागारी) के साथ रसातल नृत्य में संलग्न रहते हैं।
आपकी क्रीड़ा से सभी दैत्य और कष्ट नष्ट होते हैं।
मैं आपका नमन करता हूँ।
भावार्थ: गिरिराज जी की क्रीड़ा, बांसुरी और नृत्य से वातावरण प्रेम और आनंद से भर जाता है और बाधाएँ दूर होती हैं।
श्लोक 4
पुलिन्ददारा हितशम्बारारी रमासदोदारा दयाप्रकारी।
गोवर्धने कन्द फलोपहारी ममः प्रभु श्री गिरिराजधारी॥४॥
हिंदी अर्थ:
हे गिरिराज जी! आप पुलिन्ददारा (सिंह/वृंदावन के रक्षक) के हित करने वाले हैं,
आप दयालु और कृपालु हैं।
आप गोवर्धन पर्वत की रक्षा करते हैं और वहाँ के फल-संपदा की रक्षा करते हैं।
मैं आपका नमन करता हूँ।
भावार्थ: गिरिराज जी दयालु पालक हैं और भक्तों, वृंदावन और गोवर्धन पर्वत की रक्षा करते हैं।
श्लोक 5
कलिन्दजाकूल दुकूलहारी कुमारिका कामलावितारी।
वृन्दावने गोधनवृदचारी ममः प्रभु श्री गिरिराजधारी॥५॥
हिंदी अर्थ:
हे गिरिराज जी! आप कलिन्दनदी के किनारे, ब्रज के ग्रामीणों के रक्षक हैं,
कुमारियों और भक्तों के प्रेम को स्वीकार करने वाले हैं।
आप वृंदावन में गोवर्धन की रक्षा और गोधनवृंदों की देखभाल करते हैं।
मैं आपका नमन करता हूँ।
भावार्थ: गिरिराज जी न केवल पर्वत के रक्षक हैं, बल्कि वृंदावन के गोवर्धन और गोपालों की सुरक्षा करते हैं।
श्लोक 6
व्रजेन्द्र सर्वाधिक शर्मकारी महेन्द्र गर्वाधिक गर्वहारी।
वृन्दावने कन्दफलोपहारी ममः प्रभु श्री गिरिराजधारी॥६॥
हिंदी अर्थ:
हे गिरिराज जी! आप वृंदावन के प्रमुख देवता हैं,
जो महत् गर्व और अहंकार को भी विनष्ट करने वाले हैं।
आप वृंदावन के कंद-फल (भूमि, उपज) की रक्षा करते हैं।
मैं आपका नमन करता हूँ।
भावार्थ: गिरिराज जी अहंकार और गर्व को हराते हैं और वृंदावन की समृद्धि और रक्षा के लिए सक्रिय हैं।
श्लोक 7
मनः कलानाथ तमोविदारी वंशीरवाकारित तत्कुमारि।
रासोत्सवोद्वेल रसाब्धिसारी ममः प्रभु श्री गिरिराजधारी॥७॥
हिंदी अर्थ:
हे गिरिराज जी! आप मन के अधिपति हैं और अज्ञान को दूर करते हैं।
आपकी बांसुरी और लीला से रस और आनंद फैला रहता है।
आपकी क्रीड़ा और रासोत्सव भक्तों को आनंदित करती है।
मैं आपका नमन करता हूँ।
भावार्थ: गिरिराज जी का स्मरण करने से मन शुद्ध और आनंदित होता है।
श्लोक 8
मत्तद्विपोद्याम गतानुकारी लुंठतप्रसूना प्रपदीनहारी।
रामोरसस्पर्श करप्रसारी ममः प्रभु श्री गिरिराजधारी॥८॥
हिंदी अर्थ:
हे गिरिराज जी! आप भक्तों के लिए पथ प्रदर्शक हैं,
आपके स्पर्श और स्मरण से सभी कष्ट दूर होते हैं।
आपका स्पर्श मन और हृदय को आनंद और उल्लास प्रदान करता है।
मैं आपका नमन करता हूँ।
भावार्थ: गिरिराज जी भक्तों के जीवन में संकट निवारक और आनंद देने वाले हैं।
🌼 गिरिराजधार्याष्टकम के प्रमुख लाभ
✅ 1. संकट और भय का नाश
गिरिराज जी के स्मरण से मन में भय नहीं रहता, संकट दूर होते हैं।
✅ 2. भक्ति और श्रद्धा में वृद्धि
नियमित पाठ से भक्त का हिरदय भगवान से गहरा जुड़ता है।
✅ 3. सकारात्मक ऊर्जा और शांति
पाठ से जीवन में शांति, संतुलन और आत्मिक ऊर्जा आती है।
✅ 4. गोवर्धन पूजा का विशेष फल
जो भक्त गोवर्धन पूजा करते हैं, उनके लिए यह अष्टकम बेहद फलदायी माना जाता है।
🎧 🔱 सुनें / घर में चलाएँ
👉 नीचे दिए गए गिरिराजधार्याष्टकम को श्रद्धा से सुनें या घर में चलाएँ।
🪔 पाठ की विधि
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प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
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गिरिराज जी या भगवान श्री कृष्ण की तस्वीर/मूर्ति के सामने बैठें
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तुलसी या स्फटिक माला का प्रयोग करें
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दीपक, धूप और जल अर्पित करें
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श्रद्धा भाव से 108 या 1008 पाठ करें
⏰ पाठ करने का शुभ समय
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🌅 सुबह का समय (ब्रह्म मुहूर्त) – सर्वश्रेष्ठ
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🌆 संध्या काल – मानसिक शांति हेतु
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📅 गोवर्धन पूजा / एकादशी / पूर्णिमा – विशेष शुभ फलदायी



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