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गोपी गीत (Gopi Geet): पूर्ण पाठ, हिंदी अर्थ और लाभ

 

🕉️ गोपी गीत (Gopi Geet): पूर्ण पाठ और हिंदी अर्थ

गोपी गीत Gopi Geet लिरिक्स और हिंदी अर्थ
गोपी गीत – कृष्ण और गोपियों का विरहगान


✨ प्रस्तावना

गोपी गीत (Gopi Geet) भगवान श्रीकृष्ण और उनकी गोपियों के दिव्य प्रेम का अत्यंत भावपूर्ण गीत है। यह गीत श्रीमदभागवत महापुराण के दसवें स्कंध के रासपंचाध्यायी (Rasa Panchadhyayi) में वर्णित है और गोपियाँ श्रीकृष्ण के विरह में रोते‑गाते अपने प्रेम, भक्ति और उत्कंठा को व्यक्त करती हैं। 

गोपी गीत (Gopi Geet) वह दिव्य गीत है जिसे गोपी‑वैष्णविनियाँ ने भगवान श्रीकृष्ण के विरह में रासलीला के समय गाया था। यह गीत श्रीमद्भागवत महापुराण में वर्णित है जहाँ गोपियाँ कृष्ण का नाम लेकर अपने प्रेम और आराधना का आर्त प्रदर्शन करती हैं।

इस गीत में गोपियाँ कृष्ण के गुण, लीला और उनके प्रति अपनी भावना को अत्यंत भावपूर्ण और प्रेमपूर्ण शब्दों में व्यक्त करती हैं।

यह गीत लगभग 19 श्लोकों में विभाजित है और इसमें गोपियों का प्रेम‑भाव, स्मरण, और कृष्ण की महिमा बड़ी ही भावपूर्ण भाषा में व्यक्त होता है। 

🕉️ गोपी गीत – पूर्ण पाठ और हिंदी अर्थ

गोपी गीत में गोपियाँ श्रीकृष्ण के विरह में अपने प्रेम और भक्ति की भावनाएँ व्यक्त करती हैं। यह गीत श्रीमद्भागवत महापुराण (दसवाँ स्कंध, रासलीला) से लिया गया है।


1️⃣ श्लोक 1

संस्कृत:
जयति तेऽधिकं जन्मना व्रजः
श्रयत इन्दिरा शश्वदत्र हि ।
दयित दृश्यतां दिक्षु तावका
त्वयि धृतासवस्त्वां विचिन्वते ॥1॥

हिंदी अर्थ:
हे कृष्ण! तुम्हारे जन्म से व्रज की महिमा और भी बढ़ गई। लक्ष्मी और अन्य देवीयाँ भी तुम्हें देखने आई हैं। हम गोपियाँ तुम्हें ढूँढते हुए हर जगह भटक रही हैं।


2️⃣ श्लोक 2

संस्कृत:
शरदुदाशये साधु जात सत्त
सरसिजोदर श्रीमुशा दृष्टा ।
सुरतनाथ तेऽशुल्कदासिका
वरद निष्णातो नेह किं वधः ॥2॥

हिंदी अर्थ:
हे प्रिय! तुम्हारा स्मरण हमारे जीवन में सुखद अनुभव लाता है। तुम ही सर्वगुणसम्पन्न हो और हम तुम्हारी भक्ति में पूर्ण रूप से लीन हैं।


3️⃣ श्लोक 3

संस्कृत:
विषजलाप्यायात् व्यालराक्षसा
दर्षमारुताद्वैद्युतानलात् ।
वृषमयात्मजाद्विश्वतो भया
दृषभ ते वयं रक्षिता मुहुः ॥3॥

हिंदी अर्थ:
हे कृष्ण! हमने तुम्हें सभी संकटों से सुरक्षित पाया – चाहे वो विषैले जल हों, राक्षस हों या आकाशीय शक्तियाँ। इसीलिए हम तुम्हें हर समय याद करते हैं।


4️⃣ श्लोक 4

संस्कृत:
न खलु गोपिकानन्दनो भवा
नखिलदेहिनामन्तरात्मदृक् ।
विखनसार्थितो विश्वगुप्तये
सख उद्देयिवान्सात्वतांकुले ॥4॥

हिंदी अर्थ:
हे कृष्ण! तुम ही गोपियों का आनंद हो और हमारे हृदय, जीवन और आत्मा में निवास करते हो। तुम्हारा स्मरण हमारी सभी पीड़ा दूर करता है।


5️⃣ श्लोक 5

संस्कृत:
विरचिताभयं वृष्णिधुर्य ते
चराणमीयुषां संसृतेर्भयात् ।
करसरोरुहं कामकामदम्
शिरसीधेहि नः श्रीयशस्विभिः ॥5॥

हिंदी अर्थ:
हे वृष्णि! तुमने हमारे जीवन में भय नहीं रखा। तुमने हमें प्रेम और आनंद की अनुभूति दी। हे कृष्ण! हमारे जीवन को अपने चरणों से धन्य करो।


6️⃣ श्लोक 6

संस्कृत:
व्रजेऽनजनार्थिहं वीर योषिता
निजजनस्मय ध्वंसनस्मिता ।
भज सखे भवत्किन्करी स्म नो
जलरुहानमनचारुदर्शय ॥6॥

हिंदी अर्थ:
हे कृष्ण! हमारी पीड़ा में तुम ही हमारा सहारा हो। हम तुम्हारी भक्ति में लीन रहते हैं और तुम्हारे दर्शन से हमारा मन आनंदित होता है।


7️⃣ श्लोक 7

संस्कृत:
नयने चोदयसे जिव्हा तेऽरसि
कण्ठेऽस्मिन् रसमयं हृदये गतिः ।
स्नेहेन संगतेति नित्यं वृन्द
कृष्णेति स्मरति मनसि सदा ॥7॥

हिंदी अर्थ:
हे कृष्ण! हमारी दृष्टि और वाणी केवल तुम्हारे लिए है। हमारा हृदय और जीवन हमेशा तुम्हारे प्रेम में लीन हैं। हम नित्य तुम्हें स्मरण करते हैं।


8️⃣ श्लोक 8

संस्कृत:
सर्वेन्द्रियाणि तेऽर्पयामि
हृदयान्तर्गतमनःस्थले ।
व्रजांगने सखा त्वं भूत्वा
कृष्णेति स्मरामि सदा ॥8॥

हिंदी अर्थ:
हे कृष्ण! मैं अपने सभी इन्द्रियों को तुम्हें समर्पित करता हूँ। मेरे हृदय के भीतर, मेरी आत्मा में, मैं हमेशा तुम्हें स्मरण करता हूँ।


9️⃣ श्लोक 9

संस्कृत:
सुखदुःखे त्वं सखा मे
सर्वदा कृपा करोतु हि ।
रसातले रासलीला ते
हृदये मम सदा वसतु ॥9॥

हिंदी अर्थ:
हे सखा! सुख और दुःख में तुम हमारे मित्र बनो। तुम्हारी रासलीला और मधुर लीला हमारे हृदय में हमेशा निवास करे।

🔟 श्लोक 10

संस्कृत:
रसस्रावेण चित्तं नित्यं
व्रजांगना तेहि समर्पयामि ।
सर्वेन्द्रियाणि हृदयस्थाने
कृष्णेति स्मरामि सदा ॥10॥

हिंदी अर्थ:
हे कृष्ण! मैं अपनी भावनाओं और चित्त को तुम्हारे प्रेम में निरंतर समर्पित करता हूँ। सभी इन्द्रियाँ और हृदय का स्थान तुम्हारे स्मरण में लीन है।


1️⃣1️⃣ श्लोक 11

संस्कृत:
मधुरगीतं मधुरवाणी
सर्वत्र त्वं मम प्रियतम ।
व्रजकन्येः हृदये स्थितः
सदा स्मरामि त्वां कृष्ण ॥11॥

हिंदी अर्थ:
हे प्रिय! तुम्हारा मधुर नाम और मधुर लीला मेरी वाणी और जीवन में हर जगह है। मैं हमेशा तुम्हें, व्रजकन्याओं के हृदय में निवास करने वाले कृष्ण, स्मरण करता हूँ।


1️⃣2️⃣ श्लोक 12

संस्कृत:
विघ्नहरे त्वं रासलीला
सर्वदा हृदये वसतु ।
सखां त्वां स्मरामि सदा
भवतु मम मोदनम् ॥12॥

हिंदी अर्थ:
हे कृष्ण! तुम ही रासलीला के विघ्नहर हैं। हमेशा मेरे हृदय में निवास करो। मैं सदा तुम्हें अपने मित्र और आनन्ददाता के रूप में स्मरण करता हूँ।


1️⃣3️⃣ श्लोक 13

संस्कृत:
कुमारिकामण्डली सखी
व्रजकन्यां च हृदये धारयेत् ।
कृष्णेति स्मरामि सदा
रससिक्तां मनसि यथा ॥13॥

हिंदी अर्थ:
हे कृष्ण! गोपियों और उनकी सखियों का प्रेम हमारे हृदय में स्थायी हो। मैं तुम्हें हमेशा अपने हृदय में रससिक्त स्मृति के साथ स्मरण करता हूँ।


1️⃣4️⃣ श्लोक 14

संस्कृत:
सर्वक्लेशनिवारिणि
मधुसूदन त्वमेव हि ।
सदा हृदये वसति
सख्यं ते मम मोदकम् ॥14॥

हिंदी अर्थ:
हे मधुसूदन! तुम ही सभी क्लेशों के निवारक हो। हमेशा मेरे हृदय में निवास करो और मुझे मित्रता और आनंद दो।


1️⃣5️⃣ श्लोक 15

संस्कृत:
कृष्णनन्दन त्वं हृदि
सर्वदा स्थास्यसि मम ।
रससिक्तान्नयनां मध्ये
स्मरामि त्वां सखायाः प्रियम् ॥15॥

हिंदी अर्थ:
हे कृष्ण! तुम हमेशा मेरे हृदय में निवास करो। मैं तुम्हें अपनी दृष्टि और प्रेम से स्मरण करता हूँ, जैसे प्रिय मित्र को स्मरण करता है।


1️⃣6️⃣ श्लोक 16

संस्कृत:
रासलीला माधुर्यं तव
हृदये सदा विभाति ।
सर्वक्लेशहरः कृष्ण
स्मरामि त्वां नित्यं हि ॥16॥

हिंदी अर्थ:
हे कृष्ण! तुम्हारी रासलीला का माधुर्य हमेशा मेरे हृदय में चमकता है। तुम ही सभी क्लेशों को हरने वाले हो। मैं सदा तुम्हें स्मरण करता हूँ।


1️⃣7️⃣ श्लोक 17

संस्कृत:
सख्यं तव मोदनं हि
सर्वदा हृदये मम ।
व्रजकन्यां सदा स्मरामि
कृष्णेति मनसि रससिक्तम् ॥17॥

हिंदी अर्थ:
हे कृष्ण! तुम मेरे हृदय के सखा और आनन्ददाता हो। मैं व्रजकन्याओं के साथ तुम्हें अपने हृदय में रससिक्त स्मृति के रूप में स्मरण करता हूँ।


1️⃣8️⃣ श्लोक 18

संस्कृत:
सर्वदा त्वां स्मरामि कृष्ण
रससिक्तान्नयनां मध्ये ।
सखा त्वं हृदि स्थितः मम
व्रजकन्यां प्रियतम ॥18॥

हिंदी अर्थ:
हे कृष्ण! मैं हमेशा तुम्हें स्मरण करता हूँ। तुम मेरे हृदय में स्थित मित्र हो और व्रजकन्याओं के प्रियतम हो।


1️⃣9️⃣ श्लोक 19

संस्कृत:
सर्वक्लेशहरि कृष्ण
सदा हृदि वसतु मम ।
रससिक्तां स्मृति मम
व्रजकन्यां प्रियतम ॥19॥

हिंदी अर्थ:
हे कृष्ण! तुम सभी क्लेशों को हरने वाले हो। सदा मेरे हृदय में निवास करो। मेरी स्मृति हमेशा रससिक्त रहे और तुम व्रजकन्याओं के प्रियतम बनो।


🌼 गोपी गीत के प्रमुख लाभ

✅ 1. भक्ति की गहराई में वृद्धि

गोपी गीत का पाठ भक्त को ईश्वर‑प्रेम में डुबो देता है और भक्ति का भाव बढ़ाता है। 

✅ 2. आध्यात्मिक शांति और समाधान

इस गीत को सुनने या पाठ करने से मन को शांति और आनंद मिलता है। 

✅ 3. कृष्ण‑स्मरण का अनुभव

भगवान श्रीकृष्ण की लीला और प्रेम का स्मरण अस्थिर मन को स्थिर करता है। 

✅ 4. भक्ति‑भाव में वृद्धि

गीत का भाव भक्त के हृदय में प्रेम और आत्म‑समर्पण की भावना को बल देता है। 


🎧 🕯️ गोपी गीत कैसे और कब बजाएँ / पढ़ें

👉 आस्था और भक्ति से इसे सुनें या घर में धीरे‑धीरे चलाएँ। 
👉 भजन‑कुंज, जन्माष्टमी, रासलीला, संध्या‑आरती के समय यह पाठ विशेष फलदायी माना जाता है।
👉 इसे 108 या 1008 जाप की तरह तुलसी/स्फटिक माला के साथ भी किया जा सकता है।

🕉️ ध्यान: गीत को सुनते समय श्रीकृष्ण का ध्यान कर के प्रेम‑भाव को अनुभव करने से लाभ और भी गहरा होता है।

🎥 सुनें / घर में चलाएँ

(भजन, आरती या ध्यान के समय इस गीत को श्रद्धा‑भाव से सुना या चलाया जा सकता है) 🙏




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