एकादशी में संक्रांति पड़ने पर चावल का दान होगा या नहीं? जानिए शास्त्रों का पूरा निर्णय
भूमिका
हिंदू धर्म में मकर संक्रांति और एकादशी दोनों ही अत्यंत पुण्यदायी पर्व माने जाते हैं। मकर संक्रांति पर चावल, तिल, गुड़ और वस्त्र दान करने की परंपरा है, जबकि एकादशी पर चावल का सेवन और दान वर्जित बताया गया है।
ऐसे में जब एकादशी और संक्रांति एक ही दिन पड़ जाए, तो भक्तों के मन में सबसे बड़ा प्रश्न उठता है —
क्या इस बार संक्रांति पर चावल का दान होगा या नहीं?
इस लेख में हम शास्त्रों, धर्मग्रंथों और आचार्य मत के अनुसार इसका स्पष्ट उत्तर जानेंगे।
📿 एकादशी पर चावल क्यों वर्जित माने जाते हैं?
पद्मपुराण और विष्णु धर्मसूत्र के अनुसार —
एकादशी के दिन चावल में पाप का वास माना गया है।
धारणा है कि —
एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है
चावल जल तत्व से जुड़ा अन्न है
एकादशी के दिन चावल खाने या दान करने से व्रत भंग माना जाता है
इसी कारण एकादशी पर चावल खाना ही नहीं, चावल का दान भी निषिद्ध बताया गया है।
मकर संक्रांति पर चावल दान का महत्व
मकर संक्रांति सूर्य देव से जुड़ा पर्व है। इस दिन—
सूर्य उत्तरायण होते हैं
दान का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है
चावल, तिल, गुड़, खिचड़ी का दान विशेष फलदायी माना गया है
लेकिन यह नियम सामान्य संक्रांति के लिए है, न कि एकादशी संयोग वाली संक्रांति के लिए।
जब एकादशी और संक्रांति एक ही दिन हो तो क्या करें?
धर्मशास्त्रों के अनुसार —
व्रत का नियम दान से ऊपर माना जाता है।
अर्थात:
यदि संक्रांति एकादशी तिथि में पड़ती है
तो एकादशी का नियम प्रधान होगा
ऐसे में चावल का दान नहीं करना चाहिए
फिर कौन-सा दान करें?
ऐसी स्थिति में आप निम्न दान कर सकते हैं —
✔ तिल का दान
✔ गुड़ का दान
✔ फल का दान
✔ वस्त्र दान
✔ तांबे के पात्र
✔ घी या तेल
✔ दक्षिणा
👉 इससे संक्रांति का पुण्य भी मिलेगा और एकादशी का व्रत भी सुरक्षित रहेगा।
शास्त्रों का स्पष्ट निर्णय
धर्मसिंधु, निर्णयसिंधु और कई पंचांगों के अनुसार —
एकादशी तिथि में आने वाली संक्रांति पर
चावल से बना कोई भी पदार्थ दान योग्य नहीं है
यहाँ तक कि खिचड़ी दान भी वर्जित माना गया है
क्या भूल से चावल दान हो जाए तो?
यदि अनजाने में चावल दान हो जाए —
भगवान विष्णु से क्षमा प्रार्थना करें
गाय को हरा चारा खिलाएं
ब्राह्मण को फल और दक्षिणा दें
इससे दोष शांत हो जाता है।
एकादशी + संक्रांति = कौन-सा नियम प्रधान?
धर्मशास्त्रों में एक स्पष्ट सिद्धांत है:
व्रत नियम > दान नियम
अर्थात:
व्रत का पालन पहले
दान उसके बाद
जब संक्रांति एकादशी तिथि में पड़ती है, तब:
एकादशी का नियम प्रधान होगा
संक्रांति का दान एकादशी के अनुकूल ही होगा
निष्कर्ष
इस बार यदि संक्रांति एकादशी के दिन पड़ रही है, तो चावल का दान नहीं करना चाहिए।
शास्त्रों के अनुसार एकादशी का नियम प्रधान होता है।
आप तिल, गुड़, फल और वस्त्र दान करके — ✔ संक्रांति का पुण्य
✔ एकादशी का व्रत
दोनों का पूर्ण फल प्राप्त कर सकते हैं।



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