अक्षय तृतीया 2026 : धार्मिक महत्व, पौराणिक कथा, पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, क्या खरीदें और क्या करें

 अक्षय तृतीया 2026 : धार्मिक महत्व, पूजा विधि और शुभ फल प्राप्ति का दिव्य पर्व

अक्षय तृतीया पूजा में लक्ष्मी विष्णु की आरती करते हुए भक्त और सोने के आभूषण




अक्षय तृतीया क्या है

अक्षय तृतीया हिन्दू धर्म का अत्यंत पवित्र और शुभ पर्व माना जाता है। यह पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। इस दिन का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व अत्यधिक बताया गया है।

“अक्षय” शब्द का अर्थ होता है — जो कभी समाप्त न हो। अर्थात इस दिन किया गया पुण्य, दान, जप, तप और पूजा का फल जीवन भर बढ़ता रहता है।

हिन्दू धर्म में यह दिन इतना शुभ माना जाता है कि इस दिन विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यापार, संपत्ति खरीदना या अन्य मांगलिक कार्य बिना मुहूर्त देखे भी किए जा सकते हैं।


अक्षय तृतीया का पौराणिक इतिहास

अक्षय तृतीया से जुड़ी कई धार्मिक मान्यताएं और पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं।

 त्रेता युग का प्रारंभ

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार अक्षय तृतीया के दिन ही त्रेता युग का प्रारंभ हुआ था। इसलिए यह दिन सृष्टि में शुभ कार्यों के प्रारंभ का प्रतीक माना जाता है।


भगवान परशुराम का जन्म

मान्यता है कि इस दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। परशुराम को विष्णु का छठा अवतार माना जाता है। उन्होंने अधर्म और अन्याय के विरुद्ध धर्म की स्थापना की थी।



माता गंगा का धरती पर अवतरण

एक मान्यता के अनुसार इस दिन स्वर्ग से धरती पर गंगा का अवतरण हुआ था। इसलिए इस दिन गंगा स्नान का विशेष महत्व माना जाता है।



सुदामा और कृष्ण की कथा

धार्मिक कथा के अनुसार इसी दिन भगवान कृष्ण ने अपने मित्र सुदामा की गरीबी दूर कर उन्हें समृद्धि प्रदान की थी। यह कथा मित्रता और भक्ति का अद्भुत उदाहरण मानी जाती है।




अक्षय तृतीया का धार्मिक महत्व

अक्षय तृतीया को धन, समृद्धि और शुभ कार्यों की शुरुआत का दिन माना जाता है। इस दिन पूजा और दान करने से जीवन में सुख और समृद्धि बढ़ती है।
इस दिन विशेष रूप से:

✔ धन प्राप्ति के लिए पूजा की जाती है

✔ व्यापार प्रारंभ करना शुभ माना जाता है

✔ नई वस्तु खरीदना लाभदायक माना जाता है

✔ विवाह और मांगलिक कार्य किए जाते हैं



अक्षय तृतीया पर सोना खरीदने की परंपरा

भारत में अक्षय तृतीया पर सोना खरीदने की परंपरा बहुत प्राचीन है। सोना समृद्धि और लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दिन खरीदा गया सोना जीवन में स्थायी सुख और आर्थिक उन्नति लाता है। इसलिए इस दिन सोने के आभूषण, सिक्के या अन्य कीमती वस्तुएं खरीदना अत्यंत शुभ माना जाता है।



अक्षय तृतीया पूजा विधि

अक्षय तृतीया के दिन विधिपूर्वक पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है।

पूजा से पहले तैयारी

✔ सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें

✔ स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें

✔ पूजा स्थान साफ करें

✔ घर में पवित्र वातावरण बनाए




पूजा सामग्री

✔ भगवान विष्णु और लक्ष्मी की प्रतिमा
✔ फूल और माला
✔ चंदन
✔ तुलसी पत्ते
✔ दीपक और घी
✔ प्रसाद
✔ धूप और अगरबत्ती



पूजा करने की विधि

पूजा स्थान पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की स्थापना करें
गंगाजल से शुद्धिकरण करें

फूल और चंदन अर्पित करें

दीपक और धूप जलाएं

मंत्र जाप करें

प्रसाद चढ़ाएं

आरती करें


अक्षय तृतीया पर दान का महत्व

धार्मिक मान्यता है कि अक्षय तृतीया पर किया गया दान कई गुना फल देता है।

इस दिन विशेष रूप से:

✔ अन्न दान

✔ जल दान

✔ वस्त्र दान

✔ गरीबों की सहायता

✔ गौ सेवा

करना अत्यंत शुभ माना जाता है।




अक्षय तृतीया पर कौन से कार्य करना शुभ होता है

👉 नया व्यापार शुरू करना

👉 घर या वाहन खरीदना

👉 निवेश करना

👉 धार्मिक कार्य करना

👉 विवाह करना




अक्षय तृतीया पर किन कार्यों से बचना चाहिए

❌ झूठ बोलना

❌ विवाद करना

❌ क्रोध करना

❌ किसी का अपमान करना

❌ नकारात्मक विचार रखना


अक्षय तृतीया का आध्यात्मिक महत्व

यह पर्व हमें सिखाता है कि सच्चे मन से किया गया शुभ कार्य कभी नष्ट नहीं होता। यह दिन सेवा, दान और धार्मिक आस्था का प्रतीक है।

अक्षय तृतीया हमें सकारात्मक सोच और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।



 समाज में अक्षय तृतीया का महत्व

भारत में अक्षय तृतीया सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी महत्वपूर्ण त्योहार है। इस दिन लोग परिवार के साथ पूजा करते हैं और जरूरतमंदों की सहायता करते हैं।

यह त्योहार समाज में प्रेम, सहयोग और सद्भावना को बढ़ावा देता है।



 निष्कर्ष

अक्षय तृतीया केवल एक धार्मिक त्योहार नहीं बल्कि जीवन में सुख, समृद्धि और पुण्य प्राप्ति का अवसर है। इस दिन पूजा, दान और अच्छे कार्य करने से जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं।


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