ग्रहण काल के बाद घर और मंदिर का शुद्धिकरण कैसे करें? सम्पूर्ण धार्मिक विधि और नियम

 ग्रहण काल के बाद घर और मंदिर का शुद्धिकरण कैसे करें?

ग्रहण के बाद घर और मंदिर का शुद्धिकरण करते हुए पूजा और गंगाजल छिड़काव का धार्मिक दृश्य


सनातन धर्म में ग्रहण को अत्यंत महत्वपूर्ण और संवेदनशील समय माना गया है। चाहे वह सूर्य ग्रहण हो या चंद्र ग्रहण, इस दौरान वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा बढ़ने की मान्यता होती है। इसी कारण ग्रहण समाप्त होने के बाद घर और मंदिर का शुद्धिकरण करना अत्यंत आवश्यक माना गया है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण काल के दौरान देवी-देवताओं की मूर्तियां, पूजा स्थल और घर का वातावरण प्रभावित होता है। इसलिए ग्रहण समाप्त होते ही शुद्धिकरण करने से सकारात्मक ऊर्जा का पुनः प्रवेश होता है और घर में सुख-शांति बनी रहती है।



ग्रहण के बाद शुद्धिकरण क्यों जरूरी माना जाता है?

धर्म शास्त्रों के अनुसार ग्रहण काल में वातावरण में सूक्ष्म अशुद्धियां उत्पन्न होती हैं। यह समय साधना और जप के लिए श्रेष्ठ माना जाता है लेकिन सामान्य कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है।

ग्रहण समाप्त होने के बाद शुद्धिकरण करने से:

✔ घर का वातावरण पवित्र होता है

✔ नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है

✔ देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है

✔ परिवार में मानसिक शांति और सकारात्मकता आती है

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी ग्रहण के दौरान वातावरण में बैक्टीरिया और सूक्ष्म जीव बढ़ सकते हैं, इसलिए सफाई और स्नान करना स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक माना जाता है।



ग्रहण के बाद घर का शुद्धिकरण कैसे करें?

 1. स्नान करें

ग्रहण समाप्त होने के तुरंत बाद परिवार के सभी सदस्यों को स्नान करना चाहिए। स्नान में गंगाजल या तुलसी जल मिलाना अत्यंत शुभ माना जाता है।


2.पूरे घर की सफाई करें

ग्रहण के बाद घर की साफ-सफाई करना आवश्यक होता है। विशेष रूप से:

झाड़ू-पोंछा लगाएं

दरवाजे और खिड़कियों की सफाई करें

रसोई घर को अच्छे से साफ करें


🔸 3. गंगाजल का छिड़काव करें

गंगाजल को अत्यंत पवित्र माना जाता है। पूरे घर में गंगाजल छिड़कने से वातावरण शुद्ध होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।


4. पुराने या ग्रहण काल का भोजन त्याग दें

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण के दौरान रखा हुआ भोजन अशुद्ध माना जाता है। इसलिए ग्रहण के बाद ताजा भोजन बनाना चाहिए।



ग्रहण के बाद मंदिर और पूजा स्थल का शुद्धिकरण कैसे करें?

 1. पूजा स्थान की सफाई करें

मंदिर या पूजा स्थल को साफ कपड़े से साफ करें। यदि संभव हो तो मूर्तियों को गंगाजल से हल्का शुद्ध करें।


2.दीपक और धूप जलाएं

शुद्धिकरण के बाद दीपक और धूप जलाना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे वातावरण सुगंधित और सकारात्मक बनता है।


3. मंत्र जाप और आरती करें

ग्रहण के बाद भगवान का स्मरण और मंत्र जाप करने से घर में शुभता बढ़ती है। आप निम्न मंत्र का जाप कर सकते हैं:

ॐ नमः शिवाय

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय


🔸 4. तुलसी पूजा करें

तुलसी को पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। ग्रहण के बाद तुलसी पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि आती है।



ग्रहण के बाद विशेष धार्मिक कार्य

✔ दान-पुण्य करना

✔ गरीबों को भोजन कराना

✔ भगवान का भजन और कीर्तन करना

✔ मंदिर में प्रसाद चढ़ाना



ग्रहण के बाद क्या नहीं करना चाहिए?

बिना स्नान पूजा नहीं करनी चाहिए

ग्रहण का बचा भोजन नहीं खाना चाहिए

पूजा स्थल को अशुद्ध नहीं छोड़ना चाहिए



ग्रहण के बाद शुद्धिकरण का आध्यात्मिक महत्व

शुद्धिकरण केवल शारीरिक सफाई नहीं बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक शुद्धि का प्रतीक भी है। यह प्रक्रिया हमें जीवन में सकारात्मकता, पवित्रता और नई ऊर्जा प्रदान करती है।



 निष्कर्ष

ग्रहण काल के बाद घर और मंदिर का शुद्धिकरण सनातन धर्म की महत्वपूर्ण परंपरा है। यह न केवल धार्मिक दृष्टि से बल्कि वैज्ञानिक दृष्टि से भी लाभकारी माना जाता है। सही विधि से शुद्धिकरण करने से घर में सुख, शांति और समृद्धि बनी रहती है।

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