Braj Holi 2026 Ke Dhamakedaar Folk Bhajan Lyrics & Video in Hindi

 

🎉 ब्रज की फोक होली – 12 धमाकेदार भजन

ब्रज की होली के रसिया भजन – हिंदी लिरिक्स और वीडियो”
Braj Ke Folk Holi Bhajan Lyrics in Hindi


ब्रज की होली का रंग और भक्ति का संग सबसे खास होता है। इस साल 2026 में हमने आपके लिए चुने हैं 12 सबसे प्रसिद्ध ब्रज फोक होली भजन, जिन्हें आप सुन सकते हैं, गा सकते हैं और अपनी होली के उत्सव को और भी रंगीन बना सकते हैं।

1️⃣ आज बिरज में होली रे रसिया

मुखड़ा:
आज बिरज में होली रे रसिया,
होली रे रसिया, बरजोरी रे रसिया।
आज बिरज में होली रे रसिया॥

अंतरा 1:
उड़त गुलाल लाल भए बदरा,
रंग की पिचकारी रे रसिया।
आज बिरज में होली रे रसिया॥

अंतरा 2:
राधा के संग खेलें श्याम,
नंदगाँव के छोरे रे रसिया।
आज बिरज में होली रे रसिया॥

अंतरा 3:
बरसाने की छोरी झूमे,
लठमार होली रे रसिया।
आज बिरज में होली रे रसिया॥

अंतरा 4:
ढोल मृदंग और बाजे झांझर,
गूँजे जय-जयकार रे रसिया।
आज बिरज में होली रे रसिया॥

 

2️⃣ मत मारे द्रगन की चोट रसिया

मत मारे, मत मारे – 2
मत मारे डगरन की चोट रसिया,
होरी में मेरे लग जाएगी॥

अब की चोट बचाय गई हूँ – 2
कर घूँघट की ओट,
कर घूँघट की ओट रसिया,
होरी में मेरे लग जाएगी॥

मैं तो हूँ लाला, देखो भोली-भारी,
तो में भरे हैं बड़े खोट,
तो में भरे हैं बड़े खोट रसिया,
होरी में मेरे लग जाएगी॥

पुरुषोत्तम प्रभु वहीं जाए खेलो,
जहाँ तुम्हारी जोत,
जहाँ तुम्हारी जोत रसिया,
होरी में मेरे लग जाएगी॥

3️⃣ डरवाय ले गोरी रंग फागुन आयो रे

डरवाय ले गोरी रंग, फागुन आयो रे,
आयो रे, आयो रे, फागुन आयो रे॥

भागन ते फागुन है आयो,
रसिया सज-धज के अब आयो,
हम नाचे तेरे संग, फागुन आयो रे॥

बरस दिना की कसक निकारे,
रंग भर-भर पिचकारी मारे,
हम गावे हाँ-हाँ,
हम गावे तेरे संग, फागुन आयो रे॥

तबला बाजे, सारंगी बाजे,
ढोलक, झांझ, मजीरा बाजे,
और बाजे मृदंग, फागुन आयो रे॥

ब्रज की होली 2026 – नंदलाल और राधा की होली खेलते हुए”
Braj Ki Folk Holi Bhajan Lyrics in Hindi

4️⃣ बाहर आजाओ बांके बिहारी

बाहर आजाओ बांके बिहारी,
होली होगी हमारी तुम्हारी।

तेरे माथे पे चुनरी उड़ाऊँगी – 2
गोटेदार तुम्हें लेहंगा पहनाऊँगी – 2
तुझे नर से – 2 बना दूँगी नारी,
होली होगी हमारी तुम्हारी।

तेरे माथे पे बिंदिया लगाऊँगी – 2
और नैनों में कजरा लगाऊँगी – 2
लोग देंगे – 2 ताली पे ताली,
होली होगी हमारी तुम्हारी।

तेरे गालों पर गुलाल लगाऊँगी – 2
आगे-पीछे का बदला चुकाऊँगी – 2
तुम भाग न – 2 जाना मुरारी,
होली होगी हमारी तुम्हारी।

तेरे संग मैं तो खेलूँगी होली – 2
आईं चलकर मैं गोपी भोली – 2
मैं हूँ चरणों की – 2 दासी तिहारी,
होली होगी हमारी तुम्हारी।


बरसाने की होली – लठमार और रंगीन गुलाल भरी होरी”
Braj Ki Folk Holi Bhajan Lyrics in Hindi



5️⃣ होली में दीवानी बन जाऊँगी

होली में दीवानी बन जाऊँगी,
दीवानी बन जाऊँगी, दीवानी बन जाऊँगी।

होली, होली कैसी होली, रंग रंगीली होली,
बहुत दिनों से होली, होली, अब तो होली, होली,
रंगों से रच जाएगी, रंगों से रच जाएगी।

होरी में रंग डारी सारी, पच रंग चुनर कोरी,
इत ललिता, उत रसिक, रसीलो सुंदर इनकी जोड़ी,
कहाँ तू बच जाएगी, कहाँ तू बच जाएगी।

उड़े गुलाल, चले पिचकारी, कीच मची है भारी,
होरी में हुल्लड़ मचा है, खेल रही नर-नारी,
ऐसी तू नाच जाएगी, ऐसी तू नाच जाएगी।

रंग रंगीली, रसिक रसिली, आई है रंग होली,
पागल कर डारेगी होली, इक-दूजे से बोली,
दुनिया को जच जाएगी, दुनिया को जच जाएगी।

ब्रज के लोक कलाकार – होली भजन गाते हुए और ढोलक बजाते हुए”
Braj Ki Folk Holi Bhajan Lyrics in Hindi



6️⃣ वृंदावन आज मची होरी

वृंदावन आज मची होरी, वृंदावन,
हाँ रे वृंदावन हममें वृंदावन,
वृंदावन आज मची होरी, वृंदावन।

बाजत ताल, मृदंग, झांझ, ढप,
बरसत रंग, उड़त रौरी, वृंदावन।

कित्ते आए कुँवर कन्हैया,
कित्ते आई राधा गोरी, वृंदावन।

वृंदावन से कुँवर कन्हैया,
बरसाने से राधा गोरी, वृंदावन।

कौन के हाथ कनक पिचकारी,
कौन के हाथ अबीर झोरी, वृंदावन।

कृष्ण के हाथ कनक पिचकारी,
राधा के हाथ अबीर झोरी, वृंदावन।

सूरदास प्रभु देखी, मगन भये,
राधे-श्याम युगल जोड़ी, वृंदावन।

7️⃣ मैं तो सोई रही सपने में मोपे रंग डालो नंदलाल

मैं तो सोई रही सपने में,
मोपे रंग डालो नंदलाल।

सपने में आए बनबारी,
संग में भीड़ सखान की भारी।
फैंट गुलाल, हाथ पिचकारी,
मोर मुकुट, पीताम्बर सोहे, गल बाजंती माला।

खींच दई मेरे तन पिचकारी,
भींज गई मेरी पच रंग सारी।
मैं तो मरी लाज की मरी,
नाचे दे-दे ताल।

मैं भाजी पीताम्बर पकड़ो,
संग में सखा मंस्कुहा अकड़ो।
मच्यो मेरे आँगन में झगड़ो,
फागुन रंग रसाल।

ब्रज की होरी जग ते न्यारी,
बार-बार जाऊँ बलिहारी।
ब्रज बासिन की लीला न्यारी,
गांवें नयेनायें ख्याल।

8️⃣ होली खेले तो नन्दलाल 

होली खेले तो नन्दलाल अइयो बरसाने में 

आज तुम्हरी सब कसक निकारूं 
गालन पे लाला गुलचा मारुं 
भूल जाय सब चाल 
अइयो बरसाने में 

लाल गुलाल मलूँ गालन पे 
केसर घोल भरूँ बालन पे 
है जाय लाल गुलाल 
अइयो बरसाने में 

झांज मृदंग ढोल ढप बाजे 
जमुना तट पे मुरली बाजे 
भूल जाय सब ताल 
अइयो बरसाने में 

8️⃣ मेरो खोय गयो बाजूबंद रसिया होली में 

मेरो खोय गयो बाजूबंद रसिया होली में 

बाजूबंद मेरो बड़ो ही मोल को 
तोते गड़वाय लूँ पूरे तोल को 
सुन नन्द के फरजंद रसिया होली में 

सास लड़ेगी मेरी ननद लड़ेगी 
खसम की सर पर मार पड़ेगी 
है जावे सब रास भंग 
रसिया होली में 

उधम लाला तेने बहुत मचायो 
लाज शरम जाने कहाँ धार आयो 
में तो आय गयी तोते तंग रसिया होली में 

बरसाने की होली – लठमार और रंगीन गुलाल भरी होरी”
Braj Ki Folk Holi Bhajan Lyrics in Hindi



🔟 आज लट्ठों से खेलेंगे होली 

कान्हाजी को यूँ छेड़े किशोरी 
आज लट्ठों से खेलेंगे होरी 
हम तुमसे करें बरजोरी 
आज लट्ठों से खेलेंगे होरी 

चढ़ी फागुन की हमपर खुमारी 
कान्हा मारो रे भर पिचकारी 
भीग जाने दो चुनार ये कोरी 
आज लट्ठों से खेलेंगे होरी 

श्याम माना की तुम हो खिलाडी 
पर समझो न हमको अनाड़ी 
कारे तुम से न कम  है ये गोरी 
आज लट्ठों से खेलेंगे होरी 

तुमसे केसा है नाता पुराना 
ये हमने या तुमने ही जाना 
तुम चंदा तो में हूँ चकोरी 
आज लट्ठों से खेलेंगे होरी 

आओ आओ तनिक पास आओ 
प्यारे हम से न यूं शर्माओ 
होगी खुलकर के जोरा जोरि 
आज लट्ठों से खेलेंगे होरी 

1️⃣1️⃣ आज होली खेलन चलो बरसाने कों 
आज होली खेलन चलो बरसाने को 
आज होरी खेलन ब्रजराज होरी खेलन 
हिलमिल होरी खेलन चलो बरसाने को 

भैया सब मिल जाओ बूढ़े और बारे 
फैंटा कटि कस लेओ न्यारे मंजीरा बाजने को 
आज होरी खेलन चलो बरसाने को 

भैया ढप ढोलक मढाओ करो त्यारी 
लेउ हाथ कनक पिचकारी सुरंग बरसाने को 
आज होरी खेलन चलो बरसाने को 

चलके सब नाके और घाटन को घेरो 
बृषभान दुलारी को टेरो ये फगुआ मचाने को 
आज होरी खेलन चाओ बरसाने को 

भैया नंदबाबा की तुमको दुहाई 
कोउ जान न पावे लुगाई जमुन  जल लाने को 
आज होरी खेलन चलो बरसाने को 

बोले बनमाली करो मन चीते 
फिर बारह महीना बीते होरी का दिन आने को 
आज होरी खेलन चलो बरसाने को 

1️⃣2️⃣ फाग खेलन बरसाने आये  नंदकिशोर 

फाग खेलन बरसाने आये हैं नटवर नन्द किशोर 

घेर लई सब गली रंगीली 
छाय रही छवि छठा रंगीली 
ढप ढोल मृदंग बजाये  हैं  बंशी की घनघोर 

जुर मिल के सब सखियाँ आयीं 
उमड़ घटा अम्बर  में छायीं 
जिन अबीर गुलाल उड़ाए हैं भारत भर भर झोर 

 ले रहे चोट ग्वाल ढ़ालन पे 
केशर कीच अले गालन पे 
वाने हरियल बांस  मंगाए है चलन लगे चहुँ और 

भई अबीर की घोर अंधियारी 
दीखत नाही नर अरु नारी 
यहाँ राधे सेन चलाये हैं पकड़े माखन चोर 

जो लाला घर जानो चाहो 
तो होरी को फगुआ लाओ 
देखो श्याम ने सखा बुलाये हैं  बाँटत भर भर झोर 

राधे जू के हा हा खाओ 
सब सखियन के घर पहुंचाओ 
घासीराम ये कथ  गाये हैं भयो कविता की छोर 


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