होलिका अष्टक क्या है? महत्व, नियम, पूजा विधि और क्या करें क्या ना करें
होलिका अष्टक क्या है? महत्व, नियम, पूजा विधि और क्या करें क्या ना करें
होलिका अष्टक क्या है?
होलिका अष्टक हिन्दू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण धार्मिक काल माना जाता है। यह फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि से प्रारंभ होकर पूर्णिमा तक चलता है। इन आठ दिनों को अशुभ काल माना जाता है, इसलिए इस दौरान किसी भी प्रकार के शुभ कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन संस्कार आदि नहीं किए जाते।
होलिका अष्टक का संबंध होली पर्व से जुड़ा हुआ है। यह समय धार्मिक साधना, पूजा-पाठ और आत्म शुद्धि के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। मान्यता है कि इस दौरान नकारात्मक ऊर्जा अधिक सक्रिय होती है, इसलिए विशेष सतर्कता और धार्मिक आस्था रखना आवश्यक होता है।
होलिका अष्टक कब लगता है?
होलिका अष्टक हर वर्ष फाल्गुन महीने में होलिका दहन से ठीक आठ दिन पहले शुरू होता है। इस समय से होली की तैयारियां धार्मिक रूप से प्रारंभ हो जाती हैं।
पंचांग के अनुसार, जब फाल्गुन शुक्ल अष्टमी तिथि आती है, उसी दिन से होलिका अष्टक आरंभ माना जाता है और पूर्णिमा तक चलता है।
होलिका अष्टक का पौराणिक महत्व
होलिका अष्टक का संबंध भक्त प्रह्लाद और हिरण्यकश्यप की कथा से जुड़ा हुआ है। पौराणिक कथा के अनुसार हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति करने से रोकने के लिए अनेक प्रयास किए।
जब सभी प्रयास असफल हो गए, तब उसने अपनी बहन होलिका की सहायता ली। होलिका को अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था। वह प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठ गई, लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से भक्त प्रह्लाद सुरक्षित बच गए और होलिका जलकर भस्म हो गई।
इसी घटना की स्मृति में होलिका दहन किया जाता है और होलिका अष्टक का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
होलिका अष्टक का धार्मिक महत्व
होलिका अष्टक का समय आत्म चिंतन और आध्यात्मिक साधना का समय माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन दिनों भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है।
यह समय नकारात्मक शक्तियों से बचाव और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। कई लोग इस दौरान मंत्र जाप, भजन, हवन और दान-पुण्य करते हैं।
होलिका अष्टक में क्या नहीं करना चाहिए?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलिका अष्टक के दौरान कुछ कार्य वर्जित माने जाते हैं —
✔ विवाह और सगाई नहीं करनी चाहिए
✔ नया घर या वाहन नहीं खरीदना चाहिए
✔ गृह प्रवेश या मुंडन संस्कार नहीं करना चाहिए
✔ किसी नए व्यापार या शुभ कार्य की शुरुआत नहीं करनी चाहिए
इन नियमों का पालन करने से धार्मिक संतुलन बना रहता है और जीवन में सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
होलिका अष्टक में क्या करना चाहिए?
होलिका अष्टक के दौरान धार्मिक और आध्यात्मिक कार्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
✔ भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें
✔ मंत्र जाप और हनुमान चालीसा का पाठ करें
✔ गरीबों और जरूरतमंदों को दान करें
✔ घर में साफ-सफाई और सकारात्मक वातावरण बनाए रखें
होलिका अष्टक पूजा विधि
होलिका अष्टक के दौरान पूजा करने की सरल विधि —
1.सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें
2.भगवान विष्णु और लक्ष्मी जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें
3.दीपक जलाकर पूजा आरंभ करें
4.फूल, धूप, रोली और अक्षत अर्पित करें
5.विष्णु मंत्र या हनुमान चालीसा का पाठ करें
6.अंत में आरती करें और प्रसाद वितरित करें
होलिका अष्टक का आध्यात्मिक संदेश
होलिका अष्टक हमें यह सिखाता है कि सच्ची भक्ति और विश्वास हमेशा बुराई पर विजय प्राप्त करते हैं। यह समय आत्म सुधार, सकारात्मक सोच और धार्मिक आस्था को मजबूत करने का अवसर देता है।
निष्कर्ष
होलिका अष्टक हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण धार्मिक काल है, जो हमें जीवन में आध्यात्मिक संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देता है। इस दौरान धार्मिक नियमों का पालन करने से सकारात्मक ऊर्जा और मानसिक शांति प्राप्त होती है।

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