भगवान शिव को नीलकंठ क्यों कहते हैं? एक श्राप से शुरू हुई रहस्यमयी कथा
🕉️ नीलकंठ महादेव की कथा: दुर्वासा ऋषि के श्राप से समुद्र मंथन तक Bhagwan Shiv ko Neelkanth kyon kehte hain? हिंदू धर्म में भगवान शिव को अनेक नामों से जाना जाता है, लेकिन नीलकंठ महादेव नाम अपने भीतर त्याग, करुणा और सृष्टि-रक्षा का अद्भुत संदेश समेटे हुए है। यह प्रश्न अक्सर पूछा जाता है कि भगवान शिव का कंठ नीला क्यों है और नीलकंठ महादेव की कथा की शुरुआत कहाँ से होती है। इस पवित्र कथा की शुरुआत होती है दुर्वासा ऋषि के श्राप से। 🔥 दुर्वासा ऋषि का श्राप और देवताओं की शक्ति का क्षय एक समय देवराज इंद्र अपने ऐश्वर्य के अहंकार में डूबे हुए थे। उसी समय महर्षि दुर्वासा , जो शिव के परम भक्त माने जाते हैं, इंद्रलोक पहुँचे। दुर्वासा ऋषि ने इंद्र को देवी लक्ष्मी की कृपा स्वरूप एक दिव्य माला दी। अहंकारवश इंद्र ने वह माला अपने हाथी ऐरावत को पहना दी, जिसने उसे पैरों तले कुचल दिया। इस अपमान से क्रोधित होकर दुर्वासा ऋषि ने देवताओं को श्राप दिया कि— “अब देवताओं की शक्ति, तेज और ऐश्वर्य क्षीण होता जाएगा।” इस दुर्वासा ऋषि के श्राप के कारण: देवता कमजोर होने लगे असुर शक्तिशाली ह...