ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग: इतिहास, महिमा, दर्शन, पूजा विधि और यात्रा की पूरी जानकारी
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की महिमा, इतिहास, दर्शन और यात्रा की संपूर्ण जानकारी
भारत की पवित्र धरती पर भगवान शिव को समर्पित अनेक तीर्थस्थल हैं, लेकिन ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का स्थान विशेष माना जाता है। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में नर्मदा नदी के तट पर स्थित ओंकारेश्वर केवल एक प्रसिद्ध शिव मंदिर ही नहीं, बल्कि आस्था, अध्यात्म, पुरातत्व, प्राकृतिक सौंदर्य और नर्मदा की पवित्रता का अद्भुत संगम है।
मान्यता और धार्मिक परंपरा के अनुसार ओंकारेश्वर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यहां स्थित पवित्र क्षेत्र का संबंध 'ॐ' के स्वरूप से जोड़ा जाता है। नर्मदा नदी के बीच स्थित मंडहाता या ओंकार पर्वत का स्वरूप 'ॐ' जैसा दिखाई देने के कारण इस स्थान की धार्मिक महत्ता और भी बढ़ जाती है।
ओंकारेश्वर की यात्रा करने वाला श्रद्धालु केवल एक मंदिर में दर्शन नहीं करता, बल्कि नर्मदा तट, प्राचीन मंदिरों, शिव उपासना की परंपरा, ओंकार पर्वत और आसपास के अनेक आध्यात्मिक स्थलों का अनुभव भी करता है।
मध्य प्रदेश पर्यटन के अनुसार ओंकारेश्वर नर्मदा और कावेरी के संगम क्षेत्र में स्थित एक प्रमुख धार्मिक स्थल है और यहां ओंकारेश्वर, ममलेश्वर, सिद्धनाथ, गौरी सोमेश्वर सहित कई महत्वपूर्ण मंदिर और आध्यात्मिक स्थल हैं।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग कहां स्थित है?
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में स्थित है। यह पवित्र क्षेत्र नर्मदा नदी के किनारे बसा हुआ है और इसका प्रमुख मंदिर मंडहाता द्वीप या ओंकार पर्वत क्षेत्र में स्थित है।
ओंकारेश्वर इंदौर से लगभग 77–80 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। इंदौर इस क्षेत्र का प्रमुख हवाई और सड़क संपर्क केंद्र है।
नर्मदा नदी यहां के धार्मिक जीवन का अभिन्न हिस्सा है। श्रद्धालु मंदिर में भगवान शिव के दर्शन के साथ नर्मदा तट पर पूजा, स्नान और ध्यान भी करते हैं।
ओंकारेश्वर नाम क्यों पड़ा?
'ओंकारेश्वर' शब्द को 'ॐ' और 'ईश्वर' से जोड़कर देखा जाता है। हिंदू धर्म में 'ॐ' को अत्यंत पवित्र माना गया है और इसे परमात्मा का प्रतीक भी माना जाता है।
ओंकारेश्वर क्षेत्र में नर्मदा नदी के प्रवाह और यहां के भू-आकार को 'ॐ' के स्वरूप से जोड़ा जाता है। इसी कारण इस क्षेत्र को ओंकार पर्वत और मंडहाता के नाम से भी जाना जाता है।
यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए 'ॐ नमः शिवाय' का जाप, नर्मदा तट का वातावरण और भगवान शिव के दर्शन आध्यात्मिक अनुभव को और गहरा बना देते हैं।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की धार्मिक महिमा
भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में ओंकारेश्वर का महत्वपूर्ण स्थान है। धार्मिक मान्यताओं में ज्योतिर्लिंग को भगवान शिव के दिव्य प्रकाश स्वरूप से जोड़ा जाता है।
ओंकारेश्वर के संबंध में अनेक पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। इन कथाओं के अलग-अलग रूप विभिन्न धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में मिलते हैं। इसलिए इन्हें श्रद्धा और धार्मिक परंपरा के रूप में समझना उचित है।
ओंकारेश्वर मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट भी इसे भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में चौथा ज्योतिर्लिंग बताती है।
ओंकारेश्वर और ममलेश्वर का संबंध
ओंकारेश्वर की यात्रा में एक महत्वपूर्ण प्रश्न अक्सर पूछा जाता है—क्या ओंकारेश्वर और ममलेश्वर अलग-अलग ज्योतिर्लिंग हैं?
ओंकारेश्वर क्षेत्र में नर्मदा के एक ओर ओंकारेश्वर मंदिर और दूसरी ओर ममलेश्वर मंदिर स्थित है। मध्य प्रदेश सरकार के पर्यटन विवरण में दोनों मंदिरों को इस तीर्थ क्षेत्र के प्रमुख शिव मंदिरों के रूप में बताया गया है।
ममलेश्वर मंदिर, जिसे अमलेश्वर भी कहा जाता है, नर्मदा नदी के दक्षिणी तट पर स्थित है। मंदिर की प्राचीनता और स्थापत्य इसे विशेष बनाते हैं।
ओंकारेश्वर आने वाले श्रद्धालु आमतौर पर दोनों मंदिरों के दर्शन को अपनी यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।
ओंकारेश्वर मंदिर का इतिहास
ओंकारेश्वर क्षेत्र का धार्मिक इतिहास बहुत प्राचीन माना जाता है। यहां अनेक प्राचीन मंदिरों और स्थापत्य अवशेषों के कारण यह स्थान धार्मिक होने के साथ-साथ ऐतिहासिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
मध्य प्रदेश पर्यटन के अनुसार ओंकारेश्वर क्षेत्र में सिद्धनाथ मंदिर, गौरी सोमेश्वर मंदिर, ममलेश्वर मंदिर, गोविंद भगवत्पाद गुफा और अन्य प्राचीन स्थल मौजूद हैं।
ममलेश्वर मंदिर की दीवारों पर प्राचीन शिलालेखों का भी उल्लेख मिलता है। मध्य प्रदेश पर्यटन के अनुसार यहां के कुछ शिलालेख 11वीं शताब्दी से संबंधित बताए जाते हैं।
इससे पता चलता है कि ओंकारेश्वर केवल आधुनिक समय का तीर्थ नहीं है, बल्कि लंबे समय से धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का केंद्र रहा है।
ओंकारेश्वर और आदि शंकराचार्य
ओंकारेश्वर का संबंध आदि शंकराचार्य की आध्यात्मिक परंपरा से भी जोड़ा जाता है।
ओंकारेश्वर में स्थित गोविंद भगवत्पाद गुफा को आदि शंकराचार्य और उनके गुरु गोविंद भगवत्पाद से जुड़ा महत्वपूर्ण स्थल माना जाता है।
मध्य प्रदेश पर्यटन के अनुसार इसी क्षेत्र में आदि शंकराचार्य ने अपने गुरु से आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त किया था। आज भी यह स्थान आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।
ओंकारेश्वर में आदि शंकराचार्य की विशाल प्रतिमा और एकात्म धाम भी इस आध्यात्मिक परंपरा को दर्शाते हैं।
ओंकारेश्वर में कौन-कौन से मंदिर और स्थान देखें?
अगर आप ओंकारेश्वर यात्रा की योजना बना रहे हैं तो केवल मुख्य ज्योतिर्लिंग मंदिर तक सीमित न रहें। यहां और भी कई महत्वपूर्ण धार्मिक और ऐतिहासिक स्थान हैं।
1. ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर
यह यात्रा का मुख्य केंद्र है। नर्मदा नदी के बीच स्थित ओंकार पर्वत क्षेत्र में मंदिर का धार्मिक वातावरण श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
मुख्य मंदिर में भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग के दर्शन किए जाते हैं।
मंदिर की वास्तुकला और आसपास का वातावरण भी देखने योग्य है।
2. ममलेश्वर महादेव मंदिर
ममलेश्वर महादेव मंदिर नर्मदा के दक्षिणी तट पर स्थित है।
इसे अमलेश्वर भी कहा जाता है। ओंकारेश्वर यात्रा में ममलेश्वर के दर्शन को विशेष महत्व दिया जाता है।
मंदिर की प्राचीन स्थापत्य शैली और धार्मिक वातावरण इसे देखने योग्य बनाते हैं।
3. सिद्धनाथ मंदिर
सिद्धनाथ मंदिर ओंकारेश्वर के महत्वपूर्ण प्राचीन मंदिरों में से एक है।
मध्य प्रदेश पर्यटन के अनुसार मंदिर की वास्तुकला में प्रारंभिक मध्यकालीन शैली की विशेषताएं देखने को मिलती हैं। मंदिर के पत्थरों पर बनी नक्काशी और हाथियों की आकृतियां इसकी विशेषता हैं।
4. गौरी सोमेश्वर मंदिर
गौरी सोमेश्वर मंदिर भी ओंकारेश्वर के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है।
यह मंदिर भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित है। मंदिर की स्थापत्य शैली इसे अन्य मंदिरों से अलग बनाती है।
5. गोविंद भगवत्पाद गुफा
आदि शंकराचार्य से जुड़ी गोविंद भगवत्पाद गुफा आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखती है।
जो श्रद्धालु ओंकारेश्वर को केवल पर्यटन स्थल के बजाय आध्यात्मिक यात्रा के रूप में देखना चाहते हैं, उनके लिए यह स्थान विशेष हो सकता है।
6. ओंकार पर्वत परिक्रमा
ओंकारेश्वर परिक्रमा यहां की प्रमुख धार्मिक गतिविधियों में से एक है।
आधिकारिक मंदिर वेबसाइट के अनुसार ओंकार पर्वत की परिक्रमा लगभग 7 किलोमीटर की है। परिक्रमा के दौरान कई प्राचीन और धार्मिक स्थल देखने को मिलते हैं।
यदि आप परिवार के साथ यात्रा कर रहे हैं तो परिक्रमा शुरू करने से पहले अपनी शारीरिक क्षमता, मौसम और समय का ध्यान जरूर रखें।
7. एकात्म धाम
ओंकारेश्वर में एकात्म धाम आदि शंकराचार्य की अद्वैत वेदांत परंपरा से जुड़ा महत्वपूर्ण आध्यात्मिक परिसर है।
यह स्थान आधुनिक सुविधाओं के साथ ओंकारेश्वर की आध्यात्मिक विरासत को समझने का अवसर देता है।
ओंकारेश्वर मंदिर में दर्शन का समय
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट पर दिए गए वर्तमान दैनिक कार्यक्रम के अनुसार:
- सुबह 4:30 से 5:00 बजे तक — मंगल आरती और भोग
- सुबह 5:00 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक — मंगल दर्शन
- दोपहर 12:20 से 1:15 बजे तक — मध्याह्न भोग
- दोपहर 1:15 से शाम 4:00 बजे तक — दर्शन
- शाम 4:00 से 4:30 बजे तक — श्रृंगार
- शाम 4:30 से रात 9:30 बजे तक — श्रृंगार दर्शन
- रात 9:30 से 10:00 बजे तक — शयन आरती
- रात 10:00 से 10:30 बजे तक — शयन दर्शन
आरती, श्रृंगार और विशेष अवसरों पर सामान्य दर्शन व्यवस्था में बदलाव हो सकता है। इसलिए यात्रा से पहले आधिकारिक मंदिर वेबसाइट पर नवीनतम समय जरूर जांचना चाहिए।
ममलेश्वर मंदिर का दर्शन समय
ममलेश्वर मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार वर्तमान कार्यक्रम में सुबह 5:00 से 5:30 बजे तक मंगल आरती, 5:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक दर्शन, दोपहर में आरती के बाद दर्शन और रात 8:30 से 10:00 बजे तक दर्शन की व्यवस्था बताई गई है। विशेष अवसरों पर समय बदल सकता है।
ओंकारेश्वर में भगवान शिव की पूजा कैसे करें?
ओंकारेश्वर में भगवान शिव की पूजा करते समय श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार जल, बेलपत्र, पुष्प और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं।
लेकिन मंदिर के गर्भगृह में पूजन सामग्री ले जाने के संबंध में व्यवस्था समय-समय पर बदल सकती है। आधिकारिक मंदिर वेबसाइट भी बताती है कि कुछ अवसरों पर बेलपत्र, फूल, नारियल आदि गर्भगृह में ले जाने की अनुमति नहीं हो सकती।
इसलिए किसी भी सामग्री को मंदिर के अंदर ले जाने से पहले वहां की वर्तमान व्यवस्था और निर्देशों का पालन करना चाहिए।
भगवान शिव के सामने बैठकर श्रद्धापूर्वक:
ॐ नमः शिवाय
का जाप करना भी शिव उपासना का सरल और लोकप्रिय तरीका है।
ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी का महत्व
ओंकारेश्वर की पहचान भगवान शिव के साथ-साथ मां नर्मदा से भी जुड़ी हुई है।
नर्मदा नदी भारत की प्रमुख पवित्र नदियों में मानी जाती है। ओंकारेश्वर में नर्मदा का वातावरण पूरे तीर्थ क्षेत्र को विशेष आध्यात्मिक स्वरूप प्रदान करता है।
सुबह के समय नर्मदा तट पर बैठकर नदी के दर्शन करना, शांत वातावरण में भगवान शिव का स्मरण करना और 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करना श्रद्धालुओं के लिए विशेष अनुभव हो सकता है।
ओंकारेश्वर क्षेत्र में नर्मदा और कावेरी के संगम का भी धार्मिक महत्व बताया जाता है।
ओंकारेश्वर कैसे जाएं?
सड़क मार्ग से ओंकारेश्वर
ओंकारेश्वर मध्य प्रदेश के प्रमुख शहरों से सड़क मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है।
इंदौर से ओंकारेश्वर सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है। खंडवा से भी सड़क मार्ग उपलब्ध है।
अगर आप परिवार के साथ यात्रा कर रहे हैं तो निजी वाहन या टैक्सी से जाना सुविधाजनक हो सकता है।
ट्रेन से ओंकारेश्वर
ओंकारेश्वर के लिए यात्रा करते समय इंदौर और खंडवा प्रमुख रेल संपर्क केंद्र हो सकते हैं। वहां से सड़क मार्ग द्वारा ओंकारेश्वर पहुंचा जा सकता है।
यात्रा की योजना बनाते समय अपनी ट्रेन के अनुसार आगे की टैक्सी या बस की व्यवस्था पहले से देख लेना सुविधाजनक रहता है।
हवाई मार्ग से ओंकारेश्वर
ओंकारेश्वर के लिए निकटतम प्रमुख हवाई संपर्क केंद्र इंदौर है। आधिकारिक जिला वेबसाइट के अनुसार इंदौर हवाई अड्डा ओंकारेश्वर से लगभग 84 किलोमीटर दूर है।
ओंकारेश्वर में कहां ठहरें?
ओंकारेश्वर में श्रद्धालुओं के लिए विभिन्न प्रकार के ठहरने के विकल्प उपलब्ध हैं। मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट पर भी ओंकारेश्वर में उपलब्ध आवास विकल्पों की जानकारी दी गई है।
आप अपनी जरूरत के अनुसार:
- धर्मशाला
- भक्त निवास
- बजट होटल
- निजी होटल
- पर्यटन विभाग के आवास
जैसे विकल्प देख सकते हैं।
त्योहारों, सोमवार, सावन, महाशिवरात्रि और अन्य महत्वपूर्ण धार्मिक अवसरों पर भीड़ अधिक हो सकती है। ऐसे समय में ठहरने की व्यवस्था पहले कर लेना बेहतर रहता है।
ओंकारेश्वर जाने का सबसे अच्छा समय
ओंकारेश्वर धार्मिक स्थल होने के कारण वर्षभर श्रद्धालु यहां आते हैं।
फिर भी मौसम की दृष्टि से यात्रा के लिए अक्टूबर से मार्च के बीच का समय अपेक्षाकृत आरामदायक माना जा सकता है।
सावन और महाशिवरात्रि जैसे अवसरों पर धार्मिक उत्साह बहुत अधिक रहता है, लेकिन इसी कारण भीड़ भी बढ़ सकती है।
यदि आपका उद्देश्य शांत वातावरण में दर्शन और यात्रा करना है तो सामान्य दिनों में यात्रा की योजना बनाना सुविधाजनक हो सकता है।
ओंकारेश्वर यात्रा में किन बातों का ध्यान रखें?
ओंकारेश्वर यात्रा पर जाने से पहले कुछ छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने से यात्रा अधिक सुविधाजनक हो सकती है।
1. मंदिर का वर्तमान समय जरूर देखें
मंदिर की आरती और दर्शन व्यवस्था समय-समय पर बदल सकती है।
2. आरामदायक कपड़े पहनें
परिक्रमा और मंदिर दर्शन के दौरान काफी पैदल चलना पड़ सकता है।
3. भीड़ वाले दिनों में पहले पहुंचें
सोमवार, सावन, महाशिवरात्रि और विशेष धार्मिक अवसरों पर दर्शन में अधिक समय लग सकता है।
4. नर्मदा तट पर सावधानी रखें
नदी में उतरते समय स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।
5. मंदिर के नियमों का पालन करें
मोबाइल, कैमरा, पूजा सामग्री और अन्य वस्तुओं को लेकर मंदिर के वर्तमान नियमों का पालन करना चाहिए।
6. परिक्रमा अपनी क्षमता के अनुसार करें
ओंकार पर्वत की परिक्रमा धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन इसमें पैदल चलना पड़ता है। बुजुर्गों और छोटे बच्चों के साथ यात्रा करते समय सुविधा का ध्यान रखें।
ओंकारेश्वर में क्या देखें? एक आसान यात्रा योजना
अगर आपके पास ओंकारेश्वर में एक पूरा दिन है तो आप अपनी यात्रा इस तरह व्यवस्थित कर सकते हैं।
सुबह
सबसे पहले सुबह जल्दी उठकर नर्मदा तट जाएं। इसके बाद स्नान या नर्मदा दर्शन करके भगवान ओंकारेश्वर के दर्शन करें।
सुबह से दोपहर
मुख्य मंदिर के दर्शन के बाद ममलेश्वर महादेव मंदिर जाएं।
इसके बाद आसपास के प्रमुख मंदिरों और धार्मिक स्थलों के दर्शन किए जा सकते हैं।
दोपहर
भोजन और थोड़ा विश्राम करें।
शाम
सिद्धनाथ मंदिर, गोविंद भगवत्पाद गुफा तथा उपलब्ध समय के अनुसार अन्य प्रमुख स्थलों को देखा जा सकता है।
शाम के बाद
नर्मदा तट पर समय बिताकर मंदिर की शाम की आरती और दर्शन का अनुभव किया जा सकता है।
यदि समय और स्वास्थ्य अनुमति दें तो ओंकार पर्वत परिक्रमा भी यात्रा में शामिल की जा सकती है।
ओंकारेश्वर यात्रा में क्या खरीदें?
धार्मिक यात्रा से लौटते समय श्रद्धालु अपनी पसंद के अनुसार:
- भगवान शिव की तस्वीर
- रुद्राक्ष
- शिवलिंग
- पूजा सामग्री
- धार्मिक पुस्तकें
- नर्मदा से संबंधित धार्मिक स्मृति सामग्री
- मंत्र और भक्ति साहित्य
ले जा सकते हैं।
खरीदारी करते समय वस्तु की गुणवत्ता और कीमत की तुलना जरूर करें।
ओंकारेश्वर क्यों जाएं?
ओंकारेश्वर की यात्रा केवल मंदिर के दर्शन तक सीमित नहीं है।
यहां आपको एक साथ कई अनुभव मिलते हैं—
भगवान शिव की भक्ति, नर्मदा नदी का पवित्र वातावरण, प्राचीन मंदिर, ओंकार पर्वत, आदि शंकराचार्य से जुड़ी परंपरा और मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत।
इसी कारण ओंकारेश्वर को भारत के प्रमुख शिव तीर्थों में विशेष स्थान प्राप्त है।
जो श्रद्धालु 12 ज्योतिर्लिंगों की यात्रा करना चाहते हैं, उनके लिए ओंकारेश्वर एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
ओंकारेश्वर से जुड़ी आध्यात्मिक अनुभूति
जब नर्मदा के किनारे घंटियों की आवाज सुनाई देती है, मंदिर से आती आरती की ध्वनि वातावरण में गूंजती है और श्रद्धालुओं के मुख से 'हर हर महादेव' और 'ॐ नमः शिवाय' का जाप सुनाई देता है, तब ओंकारेश्वर का वातावरण अपने आप में एक आध्यात्मिक अनुभव बन जाता है।
यहां की यात्रा व्यक्ति को कुछ समय के लिए रोजमर्रा की भागदौड़ से दूर ले जाकर भक्ति और आत्मचिंतन का अवसर देती है।
नर्मदा के शांत तट और भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग के दर्शन इस यात्रा को यादगार बना सकते हैं।
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें
स्थान: खंडवा जिला, मध्य प्रदेश
नदी: नर्मदा
प्रमुख मंदिर: ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग और ममलेश्वर महादेव
धार्मिक महत्व: 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक
प्रमुख क्षेत्र: मंडहाता / ओंकार पर्वत
प्रमुख गतिविधि: मंदिर दर्शन, नर्मदा दर्शन, ओंकार पर्वत परिक्रमा
प्रमुख ऐतिहासिक स्थल: सिद्धनाथ मंदिर, गौरी सोमेश्वर मंदिर, गोविंद भगवत्पाद गुफा
निकटतम प्रमुख हवाई संपर्क: इंदौर
निष्कर्ष
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग भगवान शिव के भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है। नर्मदा नदी के पवित्र तट पर स्थित यह क्षेत्र धार्मिक आस्था के साथ-साथ इतिहास, संस्कृति और प्राकृतिक सौंदर्य का भी अद्भुत मेल प्रस्तुत करता है।
अगर आप ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन, ओंकारेश्वर मंदिर की यात्रा, नर्मदा दर्शन और ओंकार पर्वत परिक्रमा की योजना बना रहे हैं तो यात्रा से पहले मंदिर के आधिकारिक दर्शन समय और वर्तमान व्यवस्थाओं की जानकारी जरूर जांचें।
भगवान ओंकारेश्वर महादेव से यही प्रार्थना है कि जो भी श्रद्धालु सच्ची श्रद्धा से उनके दर्शन के लिए आए, उसके जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हो।
हर हर महादेव।
ॐ नमः शिवाय।
स्रोत एवं उपयोगी जानकारी
ओंकारेश्वर मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार मंदिर की दैनिक दर्शन व्यवस्था और अन्य सेवाओं की जानकारी समय-समय पर अपडेट होती रहती है। यात्रा से पहले आधिकारिक जानकारी देखना उपयोगी रहेगा।
मध्य प्रदेश पर्यटन और खंडवा जिला प्रशासन की वेबसाइट पर भी ओंकारेश्वर के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों की जानकारी उपलब्ध है।

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